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Regina Cassandra का बड़ा खुलासा, बॉलीवुड में साउथ इंडियन होने की वजह से हुआ भेदभाव

साउथ की मशहूर अभिनेत्री रेजिना कैसेंड्रा ने बॉलीवुड में झेले भेदभाव और स्टीरियोटाइपिंग को लेकर बड़ा खुलासा किया है। जानिए कैसे उन्होंने चुनौतियों का सामना कर अपनी पहचान बनाई।

Neeraj Sahu

Author | Updated: 17 Feb 2026, 02:53 PM IST | 1 min read
Regina Cassandra का बड़ा खुलासा, बॉलीवुड में साउथ इंडियन होने की वजह से हुआ भेदभाव
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फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाना आसान नहीं होता, खासकर जब कलाकार किसी अलग क्षेत्रीय सिनेमा से आता हो। साउथ फिल्म इंडस्ट्री में एक दशक से ज्यादा समय तक काम करने के बाद बॉलीवुड में कदम रखने वाली अभिनेत्री रेजिना कैसेंड्रा ने हाल ही में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में झेले भेदभाव और स्टीरियोटाइपिंग को लेकर खुलकर बात की है। चेन्नई की रहने वाली रेजिना ने बताया कि फिल्मों में काम करना उनके लिए शुरुआत में सिर्फ एक अतिरिक्त गतिविधि था, लेकिन धीरे-धीरे यही उनका करियर बन गया।

हिंदी जानने के बावजूद बॉलीवुड में ‘बाहरी’ जैसा महसूस कराया गया

रेजिना कैसेंड्रा ने खुलासा किया कि हिंदी भाषा पर अच्छी पकड़ होने के बावजूद उन्हें बॉलीवुड में अपनी जगह बनाने में काफी समय लगा। उन्होंने बताया कि वह हिंदी पढ़, लिख और बोल सकती हैं और अब तक हिंदी में किए गए सभी कामों में उन्होंने अपनी आवाज का इस्तेमाल किया है। इसके बावजूद कई लोगों ने उन्हें सिर्फ ‘साउथ इंडियन अभिनेत्री’ के रूप में देखा, जिससे उन्हें खुद को साबित करने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ी।

अभिनेत्री ने कहा कि कई मौकों पर उन्हें ऐसे व्यवहार का सामना करना पड़ा, जिससे उन्हें अलग और कमतर महसूस कराया गया। उन्होंने बताया कि यह भेदभाव सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं था, बल्कि व्यवहार में भी साफ दिखाई देता था। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूरी इंडस्ट्री ऐसी नहीं है और कई लोगों ने उन्हें सहयोग भी दिया।

‘फिल्म सेट ही मेरा घर है’, चुनौतियों के बावजूद जारी रखा सफर

रेजिना कैसेंड्रा ने ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ (2019) से बॉलीवुड में एंट्री की थी। इसके बाद उन्होंने ‘रॉकेट बॉयज़’, ‘फर्जी’, ‘जाट’ और ‘केसरी चैप्टर 2’ जैसे प्रोजेक्ट्स में काम कर अपनी बहुमुखी प्रतिभा साबित की। उन्होंने कहा कि वह एक संवेदनशील और सकारात्मक व्यक्तित्व की हैं और जहां भी काम करती हैं, वहां खुद को सहज बनाने की कोशिश करती हैं।

उन्होंने बताया कि इंडस्ट्री चाहे कोई भी हो, वह अपने व्यवहार और काम से लोगों के साथ मजबूत जुड़ाव बना लेती हैं, जिससे उन्हें हर जगह अपनापन महसूस होता है।

महिला कलाकारों के लिए स्टीरियोटाइपिंग बड़ी चुनौती

रेजिना ने यह भी स्वीकार किया कि फिल्म इंडस्ट्री में महिला कलाकारों को अक्सर उनके लुक्स के आधार पर स्टीरियोटाइप कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि यह एक विजुअल माध्यम है और दर्शक जो देखते हैं, वही उनकी छवि बन जाती है। ऐसे में किसी अभिनेत्री के लिए अलग-अलग तरह के किरदार चुनना और खुद को बहुमुखी साबित करना एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया होती है।

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उन्होंने कहा कि वह हमेशा ऐसे रोल करना चाहती हैं, जो उन्हें एक ही तरह की छवि तक सीमित न करें। यही कारण है कि वह फिल्मों का चयन सोच-समझकर करती हैं।

16 साल की उम्र से शुरू हुआ सफर, आज भी सीखने की प्रक्रिया जारी

रेजिना कैसेंड्रा ने मात्र 16 साल की उम्र में फिल्मों में काम करना शुरू किया था और आज 35 साल की उम्र में भी वह खुद को सीखने की प्रक्रिया में मानती हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में काम करना जितना बाहर से आसान दिखता है, उतना वास्तव में नहीं होता। हर अनुभव उन्हें कुछ नया सिखाता है और वह लगातार खुद को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही हैं।

रेजिना का यह खुलासा बॉलीवुड में क्षेत्रीय कलाकारों के सामने आने वाली चुनौतियों और इंडस्ट्री के भीतर मौजूद स्टीरियोटाइपिंग पर एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है। इसके बावजूद उन्होंने अपने काम और प्रतिभा के दम पर खुद को एक मजबूत और सम्मानित अभिनेत्री के रूप में स्थापित किया है, जो नए कलाकारों के लिए प्रेरणा बन सकती हैं।

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