Urjanchal Tiger
सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 |

No Live TV Stream Available

Please check back later.

भारत में सबसे ज्यादा खाया जाने वाला समोसा भारतीय व्यंजन नहीं !

समोसा भारतीय व्यंजन नहीं ! यह बाहर से आने वाले प्रवासियों के द्वारा मध्य एशिया अफगानिस्तान से होता हुआ भारत पहुंचा। फारसी शब्द संबुशक से समोसे के नाम की उत्पत्ति हुई है।

Shabana Parveen

Administrator | Updated: 30 Nov 2022, 04:16 PM IST | 1 min read
समोसा भारतीय व्यंजन नहीं ! यह बाहर से आने वाले प्रवासियों के द्वारा मध्य एशिया अफगानिस्तान से होता हुआ भारत पहुंचा। फारसी शब्द संबुशक से समोसे के नाम की उत्पत्ति हुई है।
Share:
Advertisement

समोसा एक ऐसा पकवान है, जो शायद ही किसी को पसंद ना हो। समोसे के स्वाद और इसकी वैरायटी पर पूरी किताब लिखी जा सकती है। यह भारत में सबसे ज्यादा खाया जाने वाला स्ट्रीट फूड या पकवान है। हर छोटे-बड़े और खास मौके की जान बन बन चुके समोसे की कहानी भी उसी की तरह काफी स्वादिष्ट और दिलचस्प है। Also Read :समोसा (Samosa) बनाने और खाने पर यहां मिलती है सजा !

समोसा भारतीय व्यंजन नहीं !

भारतीय व्यंजन की पहचान बन चुके समोसे की शुरुआत ईरान से हुई है। यह बाहर से आने वाले प्रवासियों के द्वारा मध्य एशिया अफगानिस्तान से होता हुआ भारत पहुंचा। फारसी शब्द संबुशक से समोसे के नाम की उत्पत्ति हुई है।

11 वीं शताब्दी के इतिहासकारों ने पहली बार अपनी लेखनी में समोसे का जिक्र किया है। महमूद गजनवी के साम्राज्य में भी समोसे का जिक्र मिलता है। जिसमें कीमा व सूखे मेवे भरे होते थे, और इसे तेल में फ्राई किया जाता था।

इसके अलावा मोरक्कन यात्री इब्नबतूता ने भी मोहम्मद बिन तुगलक के दरबार में समोसे पर उसे जाने का जिक्र किया है। इसकी व्याख्या उन्होंने समोसे को कीमा और मटर भरे हुए पतली परत वाली पैस्टी का नाम दिया है।

समोसे के आकार में अब तक कोई बदलाव नहीं आया।

समय के साथ समोसे के आकार में अब तक कोई बदलाव नहीं आया। पर जैसे-जैसे समोसा भारत की ओर बढ़ता गया उसके अंदर भरे जाने वाले मटन और मेवों की जगह आलू और सब्जियों ने ले ली।

समोसा भारतीय व्यंजन नहीं ! यह बाहर से आने वाले प्रवासियों के द्वारा मध्य एशिया अफगानिस्तान से होता हुआ भारत पहुंचा। फारसी शब्द संबुशक से समोसे के नाम की उत्पत्ति हुई है।
keema samosa

समोसे का स्वाद समोसे का स्वाद भारत के लोगों की जबान पर ऐसा चढ़ा कि यह धीरे-धीरे भारत की रग रग में बस गया।भारत में अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग स्वाद और वैरायटी के समोसे मिलते हैं।

Advertisement

पंजाब में आलू के साथ-साथ पनीर के चटपटे मसालेदार समोसे मिलते हैं। तो वहीं मुगलों का इतिहास समेटे दिल्ली में आलू के साथ काजू किसमिस वाले समोसे बनाए जाते हैं। जबकि यूपी बिहार में आज भी आलू के समोसे खास पसंद किए जाते हैं।

 

समोसे के तीनों कोणों में तीन लाेकों का स्वाद समाया हुआ है।

समय के साथ साथ समोसे के स्वाद और वैरायटी में काफी बदलाव आया है। अब कई जगहों पर समोसे में आलू, मटर मूंगफली, पनीर व सब्जियों के जगह पर नूडल्स भरे जाते हैं। इसके साथ ही मार्केट में मीठे समोसे भी आसानी से मिल जाते हैं।

समोसे का स्वाद भले ही हर राज्य, गली, नुक्कड़ या दुकान के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है। पर समोसे का आकार आज भी तिकोना ही है। और इसे तेल में डीप फ्राई करके ही बनाया जाता है।

सेहत के प्रति जागरूक लोगों के लिए आजकल मार्केट में बेक किए हुए और स्टीम्ड समोसे भी मिलते हैं। पर आलू भरकर तेल में डीप फ्राई किए हुए समोसे का कोई मुकाबला नहीं। इसके तीनों कोणों में तीन लाेकों का स्वाद समाया हुआ है।

 

Ad
मिश्रा पॉली क्लीनिक एवं नर्सिंग होम
मिश्रा पॉली क्लीनिक एवं नर्सिंग होम
मोतियाबिंद का आधुनिक मशीनों एवं अनुभवी सर्जन द्वारा सुरक्षित ऑपरेशन
डॉ. के. एल. पांडेय MBBS, MS नेत्र रोग विशेषज्ञ
☎ CALL NOW 6266601178
● बलियरी रोड, रामलीला मैदान के पीछे, बैढ़न, जिला-सिंगरौली (म.प्र.) 486886