मध्यप्रदेश सरकार ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य में ‘सरस्वती अभियान’ शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य स्कूल छोड़ चुकी बेटियों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ना है। सरकार का मानना है कि इस पहल से हजारों बालिकाओं को शिक्षा की मुख्यधारा में वापस लाया जा सकेगा।
इस अभियान का औपचारिक शुभारंभ आज 10 मार्च 2026 को भोपाल में किया गया। इसके तहत पूरे प्रदेश में विशेष सर्वे कराया जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन-किन गांवों और शहरों में ऐसी बालिकाएं हैं जिन्होंने किसी कारण से पढ़ाई बीच में छोड़ दी है।
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सरकार के अनुसार कई लड़कियां सामाजिक, पारिवारिक या आर्थिक कारणों से स्कूल छोड़ देती हैं। ऐसे मामलों में उन्हें दोबारा पढ़ाई का मौका नहीं मिल पाता। सरस्वती अभियान का लक्ष्य इन्हीं बालिकाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है ताकि वे अपना भविष्य बेहतर बना सकें।
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अभियान के तहत जिन बालिकाओं की पहचान होगी, उन्हें राज्य ओपन स्कूल प्रणाली के माध्यम से पढ़ाई पूरी करने का अवसर दिया जाएगा। वे 8वीं, 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में शामिल हो सकेंगी। इसके लिए सरकार पढ़ाई की सामग्री, शैक्षणिक मार्गदर्शन और काउंसलिंग भी उपलब्ध कराएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार घरेलू जिम्मेदारियां और आर्थिक दबाव लड़कियों की पढ़ाई में रुकावट बन जाते हैं। ऐसे में यह अभियान उन बेटियों के लिए नई उम्मीद बन सकता है, जो पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं लेकिन परिस्थितियों के कारण स्कूल से दूर हो गई थीं।
सरकार को उम्मीद है कि सरस्वती अभियान से बालिका शिक्षा को नया बल मिलेगा और ज्यादा से ज्यादा लड़कियां पढ़ाई पूरी कर सकेंगी। इससे आगे चलकर उन्हें उच्च शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर भी मिल सकेंगे।



