मध्यप्रदेश सरकार पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे आगामी बजट से पहले वित्तीय स्थिति पर दबाव स्पष्ट दिखाई देने लगा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य सरकार ने पिछले 11 महीनों में लगभग ₹72,900 करोड़ का कर्ज लिया है। अब बजट पेश होने से पहले सरकार करीब ₹5,600 करोड़ का अतिरिक्त कर्ज लेने की तैयारी कर रही है। इस स्थिति ने वित्तीय प्रबंधन और खर्च संतुलन को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
जानकारों का मानना है कि राज्य सरकार द्वारा लगातार कर्ज लेने की वजह से भविष्य में ब्याज भुगतान का बोझ बढ़ सकता है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और अन्य बुनियादी विकास परियोजनाओं के लिए उपलब्ध संसाधनों पर असर पड़ने की आशंका है। सरकार को अपने राजस्व और खर्च के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए अधिक सावधानी बरतनी होगी, ताकि विकास कार्य प्रभावित न हों।
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वित्त विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कर्ज लेने का मुख्य उद्देश्य विकास योजनाओं को जारी रखना और राजस्व घाटे की भरपाई करना है। हालांकि, बढ़ता कर्ज राज्य की वित्तीय स्थिरता के लिए दीर्घकालिक चुनौती बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को राजस्व बढ़ाने के नए स्रोत तलाशने और अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण करने की जरूरत है।
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बजट 2026 से पहले राज्य की आर्थिक स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास योजनाओं और जनहित कार्यक्रमों के बीच संतुलन कैसे स्थापित करती है। आने वाले बजट में कर्ज प्रबंधन और वित्तीय सुधारों से जुड़े बड़े फैसले सामने आ सकते हैं, जो राज्य की आर्थिक दिशा तय करेंगे।





