MP Cheetah Project Expansion : सागर के नौरादेही अभयारण्य में बसाए जाएंगे चीते, पर्यटन और संरक्षण को बढ़ावा

मध्य प्रदेश सरकार ने चीता परियोजना का विस्तार करते हुए सागर जिले के नौरादेही अभयारण्य को तीसरा आवास बनाने की मंजूरी दी है। अगले दो महीनों में यहां चीतों को स्थानांतरित करने की तैयारी शुरू हो गई है।

UTN Hindi ।। Digital Team

Author | Updated: 11 Mar 2026, 04:01 PM IST | 1 min read
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मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में चल रही चीता संरक्षण परियोजना को और आगे बढ़ाने का बड़ा निर्णय लिया है। राज्य कैबिनेट ने सागर जिले के नौरादेही अभयारण्य को चीता परियोजना का तीसरा आवास बनाने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद राज्य में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सरकार के अनुसार अगले दो महीनों के भीतर कुछ चीतों को नौरादेही अभयारण्य में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए वन विभाग ने क्षेत्र की निगरानी, सुरक्षा और भोजन व्यवस्था को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। अधिकारियों का कहना है कि नौरादेही का विशाल जंगल और प्राकृतिक वातावरण चीतों के लिए अनुकूल माना जा रहा है।

पहले से दो स्थानों पर बसाए जा चुके हैं चीते

मध्य प्रदेश में चीता पुनर्वास परियोजना के तहत पहले ही कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधी सागर अभयारण्य में चीतों को बसाया जा चुका है। अफ्रीकी चीतों को भारत लाकर यहां बसाने की योजना देश की सबसे बड़ी वन्यजीव संरक्षण परियोजनाओं में से एक मानी जाती है।

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वन विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में चीतों को बसाने से उनके लिए सुरक्षित आवास बढ़ेंगे और प्रजाति के संरक्षण में मदद मिलेगी। साथ ही इससे जंगलों के पारिस्थितिकी तंत्र को भी संतुलित रखने में सहायता मिलेगी।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ

राज्य सरकार का मानना है कि नौरादेही में चीते बसाने से वन्यजीव पर्यटन को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। इससे आसपास के क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

वन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि नौरादेही अभयारण्य का क्षेत्रफल काफी बड़ा है और यहां वन्यजीवों के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है। इसलिए इसे चीता परियोजना के लिए उपयुक्त स्थान माना गया है।

सुरक्षा और निगरानी पर रहेगा खास ध्यान

चीतों के सुरक्षित पुनर्वास के लिए अभयारण्य में विशेष निगरानी व्यवस्था की जा रही है। वन विभाग द्वारा ट्रैकिंग सिस्टम, गश्त और निगरानी टीमों को मजबूत किया जा रहा है ताकि चीतों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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