मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में चल रही चीता संरक्षण परियोजना को और आगे बढ़ाने का बड़ा निर्णय लिया है। राज्य कैबिनेट ने सागर जिले के नौरादेही अभयारण्य को चीता परियोजना का तीसरा आवास बनाने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद राज्य में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सरकार के अनुसार अगले दो महीनों के भीतर कुछ चीतों को नौरादेही अभयारण्य में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए वन विभाग ने क्षेत्र की निगरानी, सुरक्षा और भोजन व्यवस्था को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। अधिकारियों का कहना है कि नौरादेही का विशाल जंगल और प्राकृतिक वातावरण चीतों के लिए अनुकूल माना जा रहा है।
Also Read
पहले से दो स्थानों पर बसाए जा चुके हैं चीते
मध्य प्रदेश में चीता पुनर्वास परियोजना के तहत पहले ही कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधी सागर अभयारण्य में चीतों को बसाया जा चुका है। अफ्रीकी चीतों को भारत लाकर यहां बसाने की योजना देश की सबसे बड़ी वन्यजीव संरक्षण परियोजनाओं में से एक मानी जाती है।
Read Today's E-Magazine
Swipe through the complete digital edition of Urjanchal Tiger right on your screen.
वन विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में चीतों को बसाने से उनके लिए सुरक्षित आवास बढ़ेंगे और प्रजाति के संरक्षण में मदद मिलेगी। साथ ही इससे जंगलों के पारिस्थितिकी तंत्र को भी संतुलित रखने में सहायता मिलेगी।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
राज्य सरकार का मानना है कि नौरादेही में चीते बसाने से वन्यजीव पर्यटन को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। इससे आसपास के क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
वन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि नौरादेही अभयारण्य का क्षेत्रफल काफी बड़ा है और यहां वन्यजीवों के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है। इसलिए इसे चीता परियोजना के लिए उपयुक्त स्थान माना गया है।
सुरक्षा और निगरानी पर रहेगा खास ध्यान
चीतों के सुरक्षित पुनर्वास के लिए अभयारण्य में विशेष निगरानी व्यवस्था की जा रही है। वन विभाग द्वारा ट्रैकिंग सिस्टम, गश्त और निगरानी टीमों को मजबूत किया जा रहा है ताकि चीतों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।



