केंद्रीय टेक्सटाइल मंत्री और बेगूसराय सांसद गिरिराज सिंह द्वारा हाल ही में चार तस्वीरों के आधार पर देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के चरित्र पर सवाल उठाए जाने के बाद राजनीतिक और सोशल मीडिया हलकों में नई बहस छिड़ गई है। इन तस्वीरों को लेकर कई तरह के दावे किए गए, लेकिन जब तथ्यों की जांच की गई तो तस्वीरों की कहानी कुछ और ही निकली।
डिजिटल युग में एआई तकनीक और मॉर्फिंग टूल्स के जरिए तस्वीरों को बदलना बेहद आसान हो गया है। ऐसे में किसी भी ऐतिहासिक व्यक्तित्व से जुड़ी तस्वीरों का इस्तेमाल कर भ्रामक नैरेटिव बनाना भी तेज़ी से बढ़ा है। नेहरू से जुड़ा यह विवाद भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।
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केंद्रीय मंत्री यहां नेहरू के फोटो दिखा रहे हैं. असल में
1. पहला-तीसरा पोस्टर AI से है
2. दूसरे में नेहरू की बहन विजयलक्ष्मी और उनकी बेटी (नेहरू की भांजी) नयनतारा हैं.
3. चौथे पर लेडी माउंटबेटेन लिखा है, जबकि वो ब्रिटिश डेप्युटी हाई कमिश्नर की पत्नी हैं. pic.twitter.com/ClpY8PW3qpNew EditionRead Today's E-Magazine
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— Swati Mishra (@swati_mishr) February 10, 2026
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पहली तस्वीर : लेडी माउंटबेटन के साथ?
बताई जा रही पहली तस्वीर को लेडी माउंटबेटन के साथ नेहरू की अंतरंग फोटो कहा गया। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार यह तस्वीर एआई या डिजिटल एडिटिंग से तैयार की गई है। मूल फोटो का प्रमाण उपलब्ध नहीं है और इसके मेटाडेटा में भी छेड़छाड़ के संकेत मिले हैं।
दूसरी तस्वीर : बहन से मुलाकात
दूसरी तस्वीर को गलत संदर्भ में पेश किया गया। दरअसल यह विजय लक्ष्मी पंडित के साथ एक पारिवारिक मुलाकात की तस्वीर है। विजय लक्ष्मी पंडित उस समय अमेरिका में भारत की राजदूत थीं। यह सामान्य पारिवारिक अभिवादन का दृश्य था, जिसे विवादित तरीके से प्रचारित किया गया।
तीसरी तस्वीर : बच्ची को किस करते नेहरू
इस फोटो को भी भ्रामक ढंग से फैलाया गया। असल में यह बच्ची नयनतारा सहगल हैं, जो विजय लक्ष्मी पंडित की बेटी और नेहरू की भतीजी हैं। पारिवारिक स्नेह के इस क्षण को गलत अर्थ देकर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया।
चौथी तस्वीर : पहचान में भ्रम
एक अन्य फोटो को भी लेडी माउंटबेटन के साथ जोड़ा गया, जबकि ऐतिहासिक रिकॉर्ड के मुताबिक वह एक स्थानीय अधिकारी की पत्नी के साथ आधिकारिक कार्यक्रम की तस्वीर है। इसे भी गलत पहचान के साथ साझा किया गया।
क्यों दोहराया जाता है यह विवाद?
नेहरू से जुड़ी इन तस्वीरों को लेकर वर्षों से फेक न्यूज़ फैलती रही है। कई बार फैक्ट-चेक सामने आने के बावजूद इन्हें समय-समय पर दोबारा वायरल किया जाता है। राजनीतिक विमर्श में इतिहास को भावनात्मक मुद्दा बनाकर चर्चा में बने रहने की रणनीति भी इसका एक कारण मानी जा रही है।

AI कंटेंट पर सरकार के नए नियम
दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में केंद्र सरकार ने एआई जनरेटेड तस्वीरों और कंटेंट पर पारदर्शिता के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनके तहत ऐसे विजुअल्स को स्पष्ट रूप से ‘एआई जनरेटेड’ बताना अनिवार्य किया गया है। इसका उद्देश्य फेक न्यूज़ पर रोक लगाना है। ऐसे समय में भ्रामक तस्वीरों का उपयोग करना खुद सरकार की नीति के विपरीत माना जा रहा है।





