उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में अभिनेता मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म घूसखोर पंडित के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। शिकायतों में आरोप है कि फिल्म का शीर्षक और सामग्री धार्मिक तथा जातिगत भावनाओं को ठेस पहुँचाती है और सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ सकती है। पुलिस ने इस मामले में IPC की धारा 153A, 295A, और IT एक्ट के प्रावधानों के तहत मुकदमा पंजीकृत किया है।
पुलिस ने बताया कि यदि किसी फिल्म सामग्री से किसी समुदाय के धार्मिक या सामाजिक भावनाओं को चोट पहुँचती है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस निर्देश के बाद ही एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।
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नेटफ्लिक्स ने हटाया Promotional सामग्री
विवाद की शुरुआत घूसखोर पंडित के टीज़र और प्रमोशनल सामग्री के जारी होने के बाद हुई थी। टीज़र के खिलाफ सोशल मीडिया और धार्मिक संगठनों से तीखी प्रतिक्रिया आई, जिससे नेटफ्लिक्स ने टीज़र और प्रमोशनल पोस्ट को प्लेटफॉर्म से हटा दिया है।
Uttar Pradesh | A case has been registered at Hazratganj Police Station against the director and team of the web series ‘Ghooskhor Pandat’ for allegedly attempting to disrupt social harmony and hurt religious/caste sentiments.
The strictest possible action will be taken against… pic.twitter.com/uN35TL8Nsz
— ANI (@ANI) February 6, 2026
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मेकर्स और कलाकारों की प्रतिक्रिया
फिल्म के निर्देशक नीरज पांडे और अभिनेता मनोज बाजपेयी ने बयान जारी कर कहा है कि फिल्म का उद्देश्य किसी समुदाय का अपमान करना नहीं है।
बाजपेयी ने कहा कि वे लोगों की भावनाओं और सरकार का सम्मान करते हैं और यह प्रोजेक्ट किसी विशेष समूह को निशाना नहीं बनाता।
निर्माताओं ने कहा कि उन्होंने प्रमोशनल सामग्री हटाने का निर्णय जनभावनाओं के प्रति सम्मान दिखाने के लिए लिया।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
विवाद अब सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा भी बन चुका है। कुछ राजनैतिक दलों और नेताओं ने इस मामले को सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देने के आरोप के संदर्भ में उठाया है। ब्राह्मण समुदाय और विभिन्न धार्मिक संगठनों ने फिल्म शीर्षक के खिलाफ विरोध जताया है, और कुछ नेताओं ने बैन तथा कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है।




