पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी छात्र आंदोलन से जुड़ा विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। प्रयागराज और भागलपुर में प्रदर्शनकारियों की हिरासत और गिरफ्तारी के आरोप सामने आए हैं, जबकि कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने प्रदर्शन से जुड़े पोस्ट हटाए जाने का दावा किया है। पुलिस और प्रशासन ने इन मामलों पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले सप्ताह हुए देशव्यापी छात्र प्रदर्शनों के बाद भी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। प्रयागराज और भागलपुर से प्रदर्शनकारियों की हिरासत और गिरफ्तारी से जुड़े मामले सामने आए हैं। साथ ही, कुछ सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने प्रदर्शन से जुड़े अपने पोस्ट हटाए जाने का दावा भी किया है।
Also Read
प्रयागराज में युवक ने हिरासत में मारपीट का लगाया आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 21 वर्षीय एक युवक को 26 जुलाई को हुए प्रदर्शन में शामिल होने के बाद पुलिस ने तस्वीर के आधार पर पहचान कर पूछताछ के लिए बुलाया।
युवक का आरोप है कि,
- उसे एक दिन से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया।
- पुलिस हिरासत में उसके साथ मारपीट की गई।
- उस पर भाजपा से जुड़े एक व्यक्ति के निजी वाहन में तोड़फोड़ का गलत आरोप लगाया गया।
हालांकि, प्रयागराज पुलिस ने इन आरोपों से अलग पक्ष रखते हुए कहा कि किसी को हिरासत में नहीं रखा गया। पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कुछ लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया था और पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

भागलपुर में नाबालिग प्रदर्शनकारी की रिहाई की प्रक्रिया
बिहार के भागलपुर में कांग्रेस की लीगल सेल से जुड़े एक पदाधिकारी ने दावा किया कि 17 वर्षीय एक छात्र को 25 जुलाई के प्रदर्शन के बाद उसके घर से पुलिस ने हिरासत में लिया था।
भागलपुर सिटी के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि नाबालिग को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया गया था और राज्य सरकार की घोषणा के अनुसार आंदोलन से जुड़े हिंसा के मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि गिरफ्तार लोगों को रिहा किया जा रहा है तथा सीसीटीवी के आधार पर जारी किए गए 155 लोगों के फोटो भी हटाए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया पोस्ट हटाए जाने के दावे
कई इंस्टाग्राम यूज़र्स ने दावा किया कि छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े उनके वीडियो प्लेटफ़ॉर्म से हटा दिए गए।
एक यूज़र ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान हुई कथित हिंसा और पुलिस कार्रवाई से जुड़े उनके कई वीडियो डिलीट कर दिए गए। हालांकि, इस संबंध में सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
CJP ने आंदोलन समाप्त करते समय रखी थीं तीन प्रमुख शर्तें
25 जुलाई को Cockroach Janta Party (CJP) ने 36 दिनों से चल रहा आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की थी।
संगठन ने दावा किया था कि केंद्र सरकार ने उनकी तीन प्रमुख मांगों पर सहमति जताई है—
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
- NEET परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा।
- प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेना और भविष्य में कोई कार्रवाई नहीं करना।
CJP ने यह भी कहा था कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहती है, तो आंदोलन फिर से शुरू किया जा सकता है।





