21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से उठाकर अस्पताल ले गई पुलिस !

By: UTN Hindi ।। Digital Team

On: Saturday, July 18, 2026 12:52 PM

Sonam Wangchuk
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सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार तड़के दिल्ली के जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। वह पिछले 21 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनकी हड़ताल कथित NEET परीक्षा अनियमितताओं, परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे सहित विभिन्न मांगों को लेकर जारी थी।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह के आधार पर की गई। वहीं, जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।

अस्पताल ने क्या बताया ?

सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय तक उपवास के कारण सोनम वांगचुक को कमजोरी और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) की शिकायत है।

अस्पताल की ओर से बताया गया कि:

  • वांगचुक पूरी तरह होश में हैं।
  • उनके सभी वाइटल पैरामीटर सामान्य हैं।
  • इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के संकेत मिलने पर उन्हें निगरानी में रखा गया है।
  • फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर बताई गई है।

डॉ. चारु बंबा ने बताया कि शनिवार सुबह करीब 7:40 बजे उन्हें अस्पताल लाया गया, जहां पहले इमरजेंसी विभाग और बाद में मेडिसिन विभाग में उनका उपचार शुरू किया गया।

सोनम वांगचुक की पत्नी ने क्या अपील की?

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपील करते हुए कहा कि उनकी अनुमति, परिवार की सहमति और पिछले 20 दिनों से स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे डॉक्टरों की राय के बिना उन्हें मुंह या नसों के जरिए कोई दवा अथवा तरल पदार्थ न दिया जाए।

दिल्ली पुलिस का पक्ष

नई दिल्ली जिला पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए की गई।

पुलिस ने कहा कि

  • प्रदर्शनकारियों ने कार्रवाई के दौरान बाधा डालने की कोशिश की।
  • इससे कुछ देर के लिए अफरातफरी की स्थिति बनी।
  • पुलिस ने संयम बरतते हुए पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी की।
  • प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर खाली करने की अपील भी की गई।

हाईकोर्ट ने क्या कहा था?

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया था कि सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जाए।

अदालत ने कहा था कि यदि डॉक्टरों की राय में उनकी स्थिति गंभीर होती है तो आवश्यक चिकित्सकीय कदम उठाए जा सकते हैं। इसी आदेश के आधार पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

प्रदर्शनकारियों का आरोप

आंदोलन से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने सुबह-सुबह कार्रवाई करते हुए वांगचुक को जबरन अस्पताल पहुंचाया।

आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने दावा किया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ धक्का-मुक्की की और उन्हें भी हिरासत में लिया गया। हालांकि पुलिस ने इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है।

विपक्ष ने उठाए सवाल

इस कार्रवाई पर विपक्षी नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी।

  • आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया।
  • समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाने का विरोध करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।

20 जुलाई को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च

आंदोलन से जुड़े संगठनों ने कहा है कि 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किया जाएगा।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें हैं:

  • कथित NEET परीक्षा अनियमितताओं की न्यायिक जांच।
  • परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार।
  • जिम्मेदारी तय करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग।

जनभागीदारी ही आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत है।

शुक्रवार को जारी वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा था कि उनका शरीर लगातार कमजोर हो रहा है, लेकिन उनका संकल्प बरकरार है।

उन्होंने समर्थकों से 20 जुलाई के संसद मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील करते हुए कहा था कि जनभागीदारी ही आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत है।

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