Digital Arrest Scam : सिंगरौली पुलिस की जागरूकता से बची ₹70 हजार की साइबर ठगी, फर्जी ‘Digital Arrest’ का कोशिश हुआ नाकाम

By: UTN Hindi ।। Digital Team

On: Tuesday, July 7, 2026 6:31 PM

Singrauli Cyber Fraud News
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सिंगरौली। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित SAFE CLICK-2026 साइबर जागरूकता अभियान 2.0 का असर अब जमीन पर साफ दिखाई देने लगा है। सिंगरौली पुलिस की सतर्कता और समय पर दी गई साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी के कारण एक परिवार ₹70 हजार की साइबर ठगी और फर्जी “डिजिटल अरेस्ट” जैसे अपराध का शिकार होने से बच गया।

Whatsapp Video Call से रची गई ठगी की साजिश

सोमवार को आयोजित जनसुनवाई में एक फरियादी परिवार ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सर्वप्रिय सिन्हा को बताया कि उनकी पुत्री श्रीमती शबनम आरा के मोबाइल पर एक व्हाट्सएप वीडियो कॉल आया।

कॉल करने वाले ने अपनी प्रोफाइल पर पुलिस अधिकारी की फोटो लगा रखी थी और खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि उनका बच्चा गलत गतिविधियों में पकड़ा गया है और उसे पुलिस हिरासत में लिया गया है।

साइबर ठग ने परिवार को डराते हुए कहा कि यदि बच्चे को छोड़ना है तो तुरंत QR Code स्कैन कर ₹70,000 जमा करें और किसी को इसकी जानकारी न दें।

डराने के लिए वीडियो कॉल

परिवार को और अधिक डराने के लिए वीडियो कॉल के दौरान बैकग्राउंड में एक बच्चे के रोने की आवाज सुनाई जा रही थी, जिसमें वह “मम्मी… मुझे बचा लो…” कह रहा था। अचानक मिली इस सूचना से महिला घबरा गई और पैसे भेजने की तैयारी करने लगी।

पिता की सूझबूझ से बची ठगी

इसी दौरान महिला के पिता मौके पर पहुंचे। उन्होंने बेटी को समझाया कि पुलिस कभी फोन पर पैसे नहीं मांगती और “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती।

उन्हें सिंगरौली पुलिस के SAFE CLICK-2026 अभियान के दौरान दी गई साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी याद आई। उन्होंने तुरंत पुलिस और संबंधित विद्यालय से संपर्क किया।

जानकारी मिलते पुलिस ने शुरू की जांच

सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल विद्यालय पहुंची और बच्चे की जानकारी ली। जांच में पता चला कि बच्चा पूरी तरह सुरक्षित अपनी कक्षा में पढ़ाई कर रहा था।

पुलिस ने बच्चे का फोटो परिजनों को भेजकर उन्हें आश्वस्त किया कि उनका बच्चा सुरक्षित है। इसके बाद स्पष्ट हो गया कि कॉल करने वाला कोई पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि साइबर अपराधी था, जो परिवार से ₹70 हजार की ठगी करने की कोशिश कर रहा था।

परिवार ने सिंगरौली पुलिस को कहा शुक्रिया 

फरियादी परिवार ने बताया कि यदि वे कुछ दिन पहले सिंगरौली पुलिस के SAFE CLICK-2026 जागरूकता कार्यक्रम में शामिल न हुए होते, तो संभवतः घबराहट में पूरी रकम साइबर अपराधियों को ट्रांसफर कर देते।

परिवार ने कहा कि समय पर मिली जागरूकता ने उन्हें आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव से बचा लिया।

पुलिस ने की अपील

सिंगरौली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है की,

  1. कोई भी व्यक्ति यदि खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, कोर्ट या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर पैसे मांगे तो उस पर विश्वास न करें।
  2. “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती।
  3. किसी भी अनजान QR Code या बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर न करें।
  4. पहले संबंधित व्यक्ति, संस्था, स्कूल या पुलिस से जानकारी की पुष्टि करें।
  5. किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

पुलिस टीम ने निभाई अहम भूमिका

इस मामले में सूचना मिलते ही बच्चे की सुरक्षा की पुष्टि करने और परिवार को समय पर राहत पहुंचाने में नगर पुलिस अधीक्षक विंध्यनगर श्री उमेश प्रजापति, थाना प्रभारी विंध्यनगर श्रीमती अर्चना द्विवेदी तथा चौकी जयंत पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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