भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में हाल के महीनों में वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों के बढ़ते इस्तीफों और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के मामलों को देखते हुए अंतरिक्ष विभाग (Department of Space – DoS) ने नई प्रशासनिक गाइडलाइन जारी की है। 14 जुलाई को जारी इस निर्देश में कहा गया है कि गगनयान मिशन और अन्य राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफे या VRS को अब सामान्य प्रक्रिया के तहत स्वीकार नहीं किया जाएगा।
जनिए किन केंद्रों को जारी हुआ आदेश?
यह निर्देश ISRO के कई प्रमुख केंद्रों को भेजा गया है, जिनमें शामिल हैं
- यूआर राव सैटेलाइट सेंटर (URSC), बेंगलुरु
- विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC), तिरुवनंतपुरम
- सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC)
- लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (LPSC)
- स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (SAC)
- नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC)
- ISTRAC
- मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी (MCF)
नए निर्देश में क्या कहा गया है ?
अंतरिक्ष विभाग के ज्ञापन के अनुसार हाल के समय में ग्रुप ‘A’ वैज्ञानिक एवं तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के मामलों में तेजी आई है, जिससे राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ रहा है।
निर्देश में कहा गया है कि
गगनयान और अन्य महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े वैज्ञानिकों एवं तकनीकी अधिकारियों के इस्तीफे या VRS को नियमित प्रक्रिया के तहत स्वीकार नहीं किया जाए।
ऐसे सभी मामलों को संबंधित केंद्र के निदेशक की स्पष्ट अनुशंसा के साथ अंतिम निर्णय के लिए सीधे Department of Space को भेजा जाएगा।
2020 के नियम में हुआ बदलाव
यह आदेश वर्ष 2020 में लागू उस प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी रूप से बदलता है, जिसके तहत ISRO के विभिन्न केंद्रों के निदेशक Scientist/Engineer-SG स्तर तक के अधिकारियों के इस्तीफे या VRS स्वीकार कर सकते थे।
अब अंतिम निर्णय अंतरिक्ष विभाग के स्तर पर लिया जाएगा।
100 से अधिक वैज्ञानिकों के छोड़ने की खबर
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार हाल के समय में 100 से अधिक वैज्ञानिक और तकनीकी अधिकारी ISRO छोड़ चुके हैं। सबसे अधिक इस्तीफे बेंगलुरु स्थित URSC और तिरुवनंतपुरम स्थित VSSC से सामने आए हैं।
इनमें वरिष्ठ वैज्ञानिक विक्टर जोसेफ टी भी शामिल हैं, जो LVM3 (पूर्व में GSLV Mk III) परियोजना के निदेशक थे। उन्होंने फरवरी में संगठन से इस्तीफा दिया। यही लॉन्च व्हीकल भविष्य के गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन में उपयोग किया जाएगा।
निजी स्पेस स्टार्टअप्स की ओर बढ़ रहा रुझान
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2020 में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने और Indian Space Policy 2023 लागू होने के बाद कई अनुभवी वैज्ञानिक निजी स्पेस स्टार्टअप्स का रुख कर रहे हैं।
वर्तमान में भारत में
- 400 से अधिक पंजीकृत स्पेस स्टार्टअप्स हैं।
- इन कंपनियों में अब तक लगभग 500 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ है।
- वर्ष 2025 में ही करीब 150 मिलियन डॉलर का निवेश आकर्षित हुआ है।
इस क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में Pixxel, Skyroot Aerospace, Agnikul Cosmos, Dhruva Space और Bellatrix Aerospace शामिल हैं।
हाल के समय में ISRO को मिले झटके
वैज्ञानिकों के इस्तीफों के अलावा ISRO को हाल के महीनों में मिशनों के स्तर पर भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
- जनवरी में PSLV-C62 मिशन निर्धारित कक्षा तक नहीं पहुंच सका।
- मई 2025 में PSLV-C61/EOS-09 (RISAT-1B) मिशन भी तीसरे चरण में तकनीकी समस्या के कारण असफल रहा।
इन घटनाओं के बावजूद ISRO अपने आगामी महत्वाकांक्षी मिशनों की तैयारियों में जुटा हुआ है।
आगे किन मिशनों पर रहेगा फोकस?
ISRO आने वाले वर्षों में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनमें प्रमुख हैं
- गगनयान मिशन
- चंद्रयान-4
- भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station – BAS)
- मंगलयान-2
इन परियोजनाओं को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की अगली बड़ी उपलब्धियों के रूप में देखा जा रहा है।

