वित्त वर्ष 2025-26 के अंतिम दिन भारतीय शेयर बाजार कमजोर रुख के साथ बंद हुआ, जिससे निवेशकों को झटका लगा। दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद BSE Sensex और Nifty 50 दोनों प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। बाजार में बिकवाली का दबाव साफ दिखाई दिया, खासकर आईटी, बैंकिंग और मेटल सेक्टर में कमजोरी देखने को मिली।
विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है। विशेष रूप से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भी बाजार पर नकारात्मक प्रभाव डाला। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि महंगाई और चालू खाते के घाटे को बढ़ा सकती है, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर होता है।
आंकड़ों की बात करें तो, हाल के दिनों में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी देखी गई है, जो 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। इसका सीधा असर परिवहन, ऊर्जा और उत्पादन लागत पर पड़ता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परिस्थितियों में विदेशी निवेशक (FII) भी सतर्क रुख अपनाते हैं, जिससे बाजार में पूंजी का प्रवाह कम हो जाता है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव बना रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं, तो आने वाले दिनों में शेयर बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा, वैश्विक आर्थिक संकेतक और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।











