सिंगरौली के हथिओदरा गांव के पास मंगलवार शाम लगभग चार से पांच बजे के बीच एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार बस की टक्कर से एक बाइक सवार युवक की मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सीधी के सेमरी पंचायत का सत्यम वर्मा पिता शिव प्रसाद रजक किसी कार्य से अपनी ससुराल गोरवी जा रहे थे। बताया जा रहा है कि जब वह हथिओदरा के पास पहुंचे, तभी देवसर की ओर से सीधी जा रही एसके बस ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी भीषण थी कि युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत डायल 112 को सूचना दी और राहत कार्य शुरू किया। सूचना मिलने के बाद पुलिस और आपातकालीन सेवा की टीम मौके पर पहुंची। घायल युवक को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की खबर मिलते ही मृतक के परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों ने भी हादसे पर दुख व्यक्त किया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। साथ ही बस चालक और वाहन से संबंधित अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार के कारण दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने सड़क सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराने की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके। सिंगरौली में सड़क हादसे लगातार बढ़ रहा है, जिस पर अंकुश तो दूर, कोई जिम्मेदार नागरिक या प्रशानिक अधिकारी दो टूक बोल नही सकता। जिले में अधिकांश मामले सड़क दुर्घटना के आते हैं, जो राहगीर या अपने से छोटे वाहनों को कुचल देते हैं। यह मामले ऐसे नही आते बल्कि इसके पीछे बहुत बड़ा चक्रव्यू है, जिसमें चालक को प्रलोभन देकर उसकी शारीरिक क्षमता से अधिक कार्य कराया जाता है, जिसके कारण आये दिन लगभग दर्जनों हादसे होते रहते हैं।
यहां मोटर वाहन मालिकों को तो अपने मुनाफे की होड़ पड़ी रहती है, न तो उन्हें किसी के परिवार की परवाह है, नहीं किसी जिंदगी की। यहां ट्रांसपोर्टर मुनाफे के चक्कर में नव प्रशिक्षु चालकों से वाहनों को चलवाते हैं, यहां तक की अधिक से अधिक चालक की उम्र 17-18 वर्ष रहती है। और तो चालक ड्रिंक करके, नशीले मादक पदार्थ का सेवन कर, नशे में धुत होकर वाहन चलाते है। ऐसे हादसों पर कब विराम लग रहा है, जिस पर आश लगाये बैठी है जनता।





