हिन्दू धर्म में सोहल श्रृंगार का क्यों है इतना महत्त्व, जानिये तथ्य

By: Shabana Parveen

On: Wednesday, May 22, 2024 10:46 AM

हिन्दू धर्म में सोहल श्रृंगार का क्यों है इतना महत्त्व, जानिये तथ्य
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Importance of Solah Shringar : हिंदू धर्म में हर शादीशुदा महिला के लिए सोहल श्रृंगार करना जरूरी होता है। ऐसा माना जाता है कि विवाहित महिलाओं को अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए सोहल श्रृंगार करना जरूरी होता है। ऋग्वेद के अनुसार, सोहल श्रृंगार न केवल महिलाओं की सुंदरता बढ़ाते हैं बल्कि उनके भाग्य में भी वृद्धि करते हैं। विवाहित महिलाओं द्वारा किया गया सोहल श्रृंगार उनके जीवन में सौभाग्य लाता है।

महिलाएं श्रंगार के लिए बहुत सारे आभूषण पहनती हैं। महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले हर आभूषण का अपना एक विशेष धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व होता है। आज इस लेख के माध्यम से हम जानेंगे कि विवाहित महिलाओं के लिए सोहल श्रृंगार इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं।

शोलह श्रृंगार में इस्तेमाल होने वाली हर चीज का अपना महत्व होता है। हिंदू धर्म को मानने वाली हर विवाहित महिला अपने पति की लंबी और खुशहाल जिंदगी की कामना से सोलह श्रृंगार करती है। आज हम जानेंगे  कि सोलह श्रृंगार में कौन-कौन सी चीजें शामिल होती हैं और उनका क्या महत्व है।

सिन्दूर

हिन्दू धर्म में सोहल श्रृंगार का क्यों है इतना महत्त्व , जानिए इसके पीछे का अद्भुत कारण

विवाह के समय मंत्रोच्चारण के साथ-साथ सिन्दूर दान किया जाता है, जो विवाह का सबसे महत्वपूर्ण सामान माना जाता है। यही एक शादीशुदा महिला की पहचान होती है। दूल्हा दुल्हन के माथे पर सिन्दूर लगाता है। यह सिन्दूर इस बात की पहचान करता है कि महिला शादीशुदा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए सिन्दूर लगाती हैं।

बिंदी

बिंदी महिलाओं के चेहरे की खूबसूरती को और भी बढ़ा देती है। आजकल भले ही महिलाएं बाजार में मिलने वाली चिपकने वाली बिंदी का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन पहले कुमकुम बिंदी का इस्तेमाल किया जाता था। मान्यता के अनुसार, यह न केवल स्त्री के सुहाग का प्रतीक है, बल्कि इसे भौंहों के बीच में भी लगाया जाता है, इसलिए बिंदी मन को शांत रखने का भी काम करती है।

काजल

आजकल आंखों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए बाजार में कई तरह के प्रोडक्ट उपलब्ध हैं, लेकिन सिर्फ काजल लगाने से आंखों की खूबसूरती बढ़ जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार काजल बुरी नजर से बचाता है इसलिए इस सोलह श्रृंगार काजल को भी शामिल किया गया है।

मंगलसूत्र

हिन्दू धर्म में सोहल श्रृंगार का क्यों है इतना महत्त्व , जानिए इसके पीछे का अद्भुत कारण

सिन्दूर की तरह मंगलसूत्र पहनने का भी एक अलग मतलब होता है। विवाह के समय दूल्हा सामाजिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए मंत्रोच्चार के बीच अपनी दुल्हन के गले में मंगलसूत्र पहनाता है। यह एक महिला के सुहाग का प्रतीक है। इसका संबंध पति की उम्र से माना जाता है। गले में पहना जाने वाला मंगलसूत्र जब शरीर से छूता है तो उसके कई फायदे होते हैं।

 मेहंदी

हिन्दू धर्म में सोहल श्रृंगार का क्यों है इतना महत्त्व , जानिए इसके पीछे का अद्भुत कारण

हिंदू धर्म में शादी के समय मेहंदी लगाना एक महत्वपूर्ण रस्म है। मेहंदी को बहुत शुभ माना जाता है। हर शादीशुदा महिला के लिए हाथों पर मेहंदी लगाना सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। प्रचलित मान्यता के अनुसार मेहंदी का रंग जितना गहरा होगा, वैवाहिक जीवन उतना ही सुखी होगा। कहते है मेहंदी के रंग की गहराई पति के प्रति प्यार की गहराई का प्रतीक है।

चूड़ियाँ

आजकल धातु आदि से बनी तरह-तरह की डिजाइन की चूड़ियां आने लगी हैं, लेकिन शादीशुदा महिला के लिए कांच की चूड़ियां पहनना शुभ माना जाता है। लाल और हरी चूड़ियाँ एक विवाहित महिला की सुंदरता को और बढ़ा देती हैं। सोलह श्रृंगार में चूड़ियों का अहम स्थान है। माना जाता है कि कंगन की झनकार नकारात्मकता को दूर करती है।

मांग टीका

एक शादीशुदा महिला के लिए मांग टीका बहुत महत्वपूर्ण होता है। माथे के बीचोबीच पहना जाने वाला यह आभूषण न केवल चेहरे की चमक बढ़ाता है बल्कि यह वैवाहिक जीवन के सही आचरण का भी प्रतीक है।

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