वैश्विक उपभोक्ता वस्तु कंपनी Unilever ने अपने पारंपरिक विज्ञापन मॉडल में बड़ा बदलाव करते हुए एक नई रणनीति अपनाई है। अब कंपनी केवल ब्रांड के जरिए ग्राहकों तक संदेश पहुंचाने के बजाय, लाखों लोगों के नेटवर्क पर भरोसा कर रही है, जो उत्पादों की सिफारिश करते हैं।
हाल ही में आयोजित Barclays के एक इवेंट में Unilever के CEO Fernando Fernandez ने इस बदलाव की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दो साल पहले तक कंपनी लगभग 10,000 ब्रांड एडवोकेट्स के साथ काम कर रही थी, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर करीब 3 लाख तक पहुंच गई है।
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यह बदलाव केवल संख्या का नहीं, बल्कि उपभोक्ता व्यवहार में आए बड़े परिवर्तन का संकेत है। आज के दौर में लोग सीधे ब्रांड पर कम और दूसरे उपभोक्ताओं, प्रोफेशनल्स या इंफ्लुएंसर्स की राय पर ज्यादा भरोसा करते हैं। Fernandez के अनुसार, यह “other people’s recommendations” का युग है, जहां ब्रांड की विश्वसनीयता बाहरी स्रोतों से बनती है।
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SASSY मॉडल पर आधारित नई रणनीति
Unilever की यह नई रणनीति उसके SASSY मॉडल पर आधारित है। यह मॉडल समकालीन प्रासंगिकता (contemporary relevance), सामाजिक स्वीकृति (social validation) और निरंतर नवाचार (constant innovation) पर जोर देता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ब्रांड हमेशा मौजूदा संस्कृति के साथ जुड़ा रहे, न कि केवल विज्ञापन के जरिए ग्राहकों पर थोपे जाएं।

इस बदलाव के साथ कंपनी ने अपने मार्केटिंग निवेश में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। चार साल पहले जहां यह निवेश कुल राजस्व का करीब 13 प्रतिशत था, वहीं अब यह बढ़कर 16 प्रतिशत से अधिक हो गया है। Foods बिजनेस को हटाकर देखें तो यह आंकड़ा और भी ज्यादा है। Fernandez ने पहले के निवेश स्तर को “consciously uncompetitive” बताया, यानी कंपनी खुद मानती है कि वह पहले आधुनिक मार्केटिंग में पर्याप्त निवेश नहीं कर रही थी।
ROI और बदलते एल्गोरिदम की चुनौती
हालांकि, इस नई रणनीति के साथ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। Fernandez ने स्वीकार किया कि इस बड़े नेटवर्क में निवेश पर मिलने वाले रिटर्न (ROI) को समझना अभी भी जटिल है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम और उपभोक्ता व्यवहार तेजी से बदलते रहते हैं, जिससे प्रभावशीलता को मापना कठिन हो जाता है।
ऑफलाइन और बड़े इवेंट्स पर भी फोकस
डिजिटल रणनीति के साथ-साथ Unilever फिजिकल रिटेल और बड़े इवेंट्स पर भी ध्यान दे रहा है। स्टोर्स में ब्रांड की विजिबिलिटी को बढ़ाया जा रहा है, क्योंकि मीडिया अब कई हिस्सों में बंट चुका है। इसके अलावा, FIFA World Cup जैसे वैश्विक आयोजनों को कंपनी उपभोक्ताओं से जुड़ने का बड़ा अवसर मानती है।
Unilever का यह नया मॉडल पारंपरिक विज्ञापन से हटकर भागीदारी आधारित मार्केटिंग की ओर इशारा करता है। अब ब्रांड खुद बोलने के बजाय दूसरों के जरिए अपनी बात पहुंचा रहे हैं। यह बदलाव आने वाले समय में पूरे विज्ञापन उद्योग के लिए एक नया मानक स्थापित कर सकता है।



