अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे, डोनाल्ड ट्रंप जूनियर… ताजमहल देखने पहुँचे। जैसे ही वो अंदर दाखिल हुए, CISF और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने पूरा परिसर अपने कब्ज़े में ले लिया। हर रास्ता साफ, हर गेट अलर्ट,सबकुछ बिल्कुल हाई-प्रोफाइल विज़िट की तरह।
लेकिन ट्रंप जूनियर सिर्फ तस्वीरों के लिए नहीं आए थे…वो आए थे ताजमहल की उस कहानी को समझने, जिसने दुनिया को मोह लिया है।
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गाइड नितिन सिंह, वही जिन्होंने 2020 में राष्ट्रपति ट्रंप को ताज दिखाया था, उन्हें हर बात विस्तार से बताया।
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उन्होंने बताया कि शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज़ महल की याद में 1632 में इस स्मारक का निर्माण शुरू करवाया था।
22 साल तक लगातार काम चला… 20 हज़ार कारीगर, फ़ारसी, तुर्क, भारतीय और मुगल कलाकार, सबने मिलकर इसे बनाया।
संगमरमर राजस्थान से आया, लाल पत्थर आगरा से, और कीमती पत्थरों पर पिएत्रा-दुरा की कला, जो ताज को इतना अनोखा बनाती है।
ट्रंप जूनियर ताज का हर कोना ध्यान से देखते रहे…
कैसे गुंबद बिना किसी सपोर्ट के खड़ा है…
कैसे संगमरमर सूरज की रोशनी में रंग बदलता है…
और क्यों ताजमहल चाँदनी रात में चांदी की तरह चमकता है।
आइकॉनिक डायना बेंच पर उन्होंने फोटो खिंचवाई, और लगभग एक घंटा इस ‘मोहब्बत के अजूबे’ में खोए रहे।
ताज भ्रमण के दौरान उनकी आख़िरी लाइन थी
“अब समझ आया, इसे दुनिया का सातवाँ अजूबा क्यों कहते हैं।”



