नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने वरिष्ठ भाजपा नेता प्रल्हाद जोशी को देश का नया केंद्रीय शिक्षा मंत्री नियुक्त किया है। यह नियुक्ति पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुई है। हाल के सप्ताहों में NEET परीक्षा विवाद को लेकर देशभर में छात्रों के प्रदर्शन तेज हो गए थे और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठ रही थी।
प्रल्हाद जोशी पहले से ही नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे हैं। अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
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नियुक्ति के बाद क्या बोले प्रल्हाद जोशी?
शिक्षा मंत्री बनाए जाने के बाद प्रल्हाद जोशी ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा उन पर जताए गए विश्वास और शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपे जाने के लिए वे आभारी हैं। उन्होंने इस दायित्व को विनम्रता और कर्तव्यबोध के साथ निभाने की बात कही।
कौन हैं प्रल्हाद जोशी?
प्रल्हाद जोशी का जन्म वर्ष 1962 में कर्नाटक के बीजापुर में हुआ था। उन्होंने कर्नाटक विश्वविद्यालय से संबद्ध केएस आर्ट्स कॉलेज, हुबली से कला स्नातक (Bachelor of Arts) की पढ़ाई की।
स्नातक के बाद उन्होंने रसायन (केमिकल) कारोबार की सह-स्थापना की, लेकिन उनकी रुचि प्रारंभ से ही राजनीति में रही। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े और बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सक्रिय नेता बने।
राजनीतिक सफर
प्रल्हाद जोशी का राजनीतिक करियर 1990 के दशक में कर्नाटक के हुबली ईदगाह मैदान आंदोलन के दौरान प्रमुखता से सामने आया।
उनके राजनीतिक सफर की प्रमुख उपलब्धियां—
- 1998 में धारवाड़ जिला भाजपा अध्यक्ष बने।
- 2004 में पहली बार धारवाड़ से लोकसभा सांसद चुने गए।
- इसके बाद लगातार पांच बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं।
- 2014 में कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने।
- 2019 में केंद्र सरकार में संसदीय कार्य, कोयला एवं खान मंत्री बने।
- 2025 में उन्हें नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली।
शिक्षा मंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, शिक्षा मंत्री के रूप में प्रल्हाद जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की परीक्षा प्रणाली और शिक्षा व्यवस्था पर छात्रों का विश्वास मजबूत करना होगा।
हाल के महीनों में NEET (National Eligibility cum Entrance Test) परीक्षा को लेकर पेपर लीक के आरोपों के बाद व्यापक विवाद हुआ। इसके बाद सरकार ने परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया था, जिससे लाखों छात्रों और अभिभावकों में चिंता और असंतोष देखने को मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, समयबद्ध सुधार और शिक्षा संस्थानों में विश्वास बहाल करना नए शिक्षा मंत्री की प्राथमिक प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है।



