Urjanchal Tiger
सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 |

No Live TV Stream Available

Please check back later.

Retirement Planning : देर से निवेश शुरू करना पड़ सकता है भारी, जानिए समय पर SIP शुरू करने के 3 बड़े सच

क्या 60 साल तक नौकरी करना ही रिटायरमेंट का रास्ता है? जानिए क्यों देर से निवेश शुरू करना आपकी करोड़ों की संपत्ति कम कर सकता है और कैसे समय पर SIP शुरू करके वित्तीय आज़ादी हासिल की जा सकती है।

नौशाबा अंजुम

Author | Updated: 10 Mar 2026, 12:15 PM IST | 1 min read
Retirement Planning : देर से निवेश शुरू करना पड़ सकता है भारी, जानिए समय पर SIP शुरू करने के 3 बड़े सच
Share:
Advertisement

भारत में लंबे समय से एक धारणा रही है कि 60 साल तक नौकरी करना ही सामान्य रिटायरमेंट का रास्ता है। लेकिन तेजी से बदलती आर्थिक परिस्थितियों और बढ़ती महंगाई के बीच यह सोच अब चुनौती के घेरे में है।

आज कई वित्तीय विशेषज्ञ मानते हैं कि रिटायरमेंट की असली उम्र आपकी नौकरी नहीं, बल्कि आपकी संपत्ति तय करती है। यानी जब आपके निवेश से मिलने वाली आय आपकी सैलरी की जगह लेने लगे, तब काम करना एक विकल्प बन जाता है, मजबूरी नहीं।

1 : आय से ज्यादा ताकत समय की होती है

निवेश की दुनिया में सबसे बड़ा हथियार समय है।

यदि कोई व्यक्ति 25 साल की उम्र से हर महीने ₹20,000 का SIP निवेश शुरू करता है और औसतन 12% वार्षिक रिटर्न मिलता है, तो 60 साल की उम्र तक उसका फंड कई करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

लेकिन अगर वही निवेश 35 साल की उम्र में शुरू किया जाए तो कुल फंड कई गुना कम रह जाता है। सिर्फ 10 साल की देरी निवेश के अंतिम परिणाम को बहुत बदल देती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जल्दी निवेश शुरू करने से कंपाउंडिंग का फायदा लंबे समय तक मिलता है और छोटी रकम भी बड़ा फंड बना सकती है।

Advertisement

2 : लाइफस्टाइल अपग्रेड, निवेश डाउनग्रेड

अधिकांश नौकरीपेशा लोगों की आय हर साल बढ़ती है। लेकिन इस बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा नई कार, महंगे गैजेट या लाइफस्टाइल खर्चों में चला जाता है।

अगर हर साल सैलरी बढ़ने पर सिर्फ ₹5,000 अतिरिक्त निवेश किया जाए, तो 20-25 साल में यह राशि लाखों रुपये के फंड में बदल सकती है।

वित्तीय सलाहकार इसे “स्टेप-अप निवेश” कहते हैं। आय बढ़ने के साथ निवेश बढ़ाना लंबी अवधि में धन निर्माण को तेज कर सकता है।

Retirement Planning : देर से निवेश शुरू करना पड़ सकता है भारी, जानिए समय पर SIP शुरू करने के 3 बड़े सच

3 : रिटायरमेंट की उम्र नहीं, संपत्ति मायने रखती है

आज की नई वित्तीय सोच में रिटायरमेंट का मतलब सिर्फ नौकरी छोड़ना नहीं है।

अगर किसी व्यक्ति के पास इतना निवेश है जिससे उसे हर साल स्थिर आय मिल सके, तो वह पारंपरिक 60 साल की उम्र से पहले भी आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकता है।

उदाहरण के तौर पर, एक बड़ा निवेश पोर्टफोलियो 7-8% वार्षिक रिटर्न दे सकता है, जिससे नियमित आय बनाई जा सकती है। यही मॉडल कई लोग “फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस” के नाम से अपनाने लगे हैं।

भारत में निवेश अभी भी कम

एक निवेशक सर्वे के अनुसार भारत में सिर्फ लगभग 9.5% परिवार ही शेयर बाजार या सिक्योरिटी मार्केट में सक्रिय निवेश करते हैं। इसका मतलब है कि बड़ी आबादी अभी भी व्यवस्थित निवेश से दूर है।

विशेषज्ञों का कहना है कि रिटायरमेंट के लिए जल्दी निवेश शुरू करना सबसे बड़ा वित्तीय फैसला हो सकता है। रिटायरमेंट की असली तैयारी नौकरी के आखिरी वर्षों में नहीं, बल्कि करियर की शुरुआत में होती है। जो लोग जल्दी निवेश शुरू करते हैं, उनके पास विकल्प ज्यादा होते हैं। जो देर से शुरू करते हैं, उन्हें ज्यादा समय तक काम करना पड़ सकता है।

इसलिए सवाल यह नहीं है कि आप 60 साल में रिटायर होंगे या नहीं। सवाल यह है कि आपने निवेश कब शुरू किया।

Ad
मिश्रा पॉली क्लीनिक एवं नर्सिंग होम
मिश्रा पॉली क्लीनिक एवं नर्सिंग होम
मोतियाबिंद का आधुनिक मशीनों एवं अनुभवी सर्जन द्वारा सुरक्षित ऑपरेशन
डॉ. के. एल. पांडेय MBBS, MS नेत्र रोग विशेषज्ञ
☎ CALL NOW 6266601178
● बलियरी रोड, रामलीला मैदान के पीछे, बैढ़न, जिला-सिंगरौली (म.प्र.) 486886