देश में चुनावी माहौल खत्म होते ही आम लोगों की नजर अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर टिक गई है। पिछले कई महीनों से ईंधन की कीमतों में बड़ी राहत देखने को नहीं मिली, लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में तेल कंपनियां दाम बढ़ा सकती हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और सरकारी दबाव में लंबे समय तक कीमतों को स्थिर रखना माना जा रहा है।
आखिर क्यों बढ़ सकती हैं कीमतें?
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़ते ही उसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है। हाल के हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव तेज हुआ है और कई बार यह 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावी अवधि में सरकारें अक्सर महंगाई को नियंत्रित रखने की कोशिश करती हैं। इसी कारण तेल कंपनियां कई बार वास्तविक लागत बढ़ने के बावजूद खुदरा कीमतों में तुरंत बदलाव नहीं करतीं। अब चुनाव खत्म होने के बाद कंपनियां नुकसान की भरपाई के लिए दाम बढ़ा सकती हैं।
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तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव
सरकारी तेल कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम लंबे समय से वैश्विक कीमतों और घरेलू रेट के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं।

अगर डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो आयात लागत और बढ़ जाती है। वर्तमान समय में यही स्थिति देखने को मिल रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहीं, तो पेट्रोल-डीजल के दाम में 2 से 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी संभव है।
क्या सरकार टैक्स में राहत दे सकती है?
ईंधन की कीमतों में केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स की बड़ी भूमिका होती है। पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी और वैट का हिस्सा काफी अधिक है। हालांकि, सरकार महंगाई और जनता की नाराजगी को देखते हुए टैक्स में कुछ राहत दे सकती है, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई बड़ा संकेत नहीं मिला है।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
पेट्रोल और डीजल महंगे होने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से फल-सब्जियों, राशन और रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं। इससे महंगाई दर पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले कुछ हफ्ते ईंधन बाजार के लिए बेहद अहम होंगे। अगर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां सामान्य नहीं हुईं, तो आम जनता को महंगे पेट्रोल-डीजल के लिए तैयार रहना पड़ सकता है।



