मध्य प्रदेश के इंदौर में एक चौंकाने वाला साइबर फ्रॉड सामने आया है, जहां एक युवक ने अवैध तरीके से 84 सिम कार्ड एक्टिवेट कर टेलीकॉम कंपनियों से बोनस हासिल किया। इस मामले का खुलासा इंदौर क्राइम ब्रांच की जांच में हुआ, जिसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
एक ही फोटो और आधार से बनाए कई सिम
पुलिस जांच के अनुसार आरोपी ने एक ही फोटो और आधार विवरण का उपयोग करके कई सिम कार्ड सक्रिय किए। इन सिम कार्डों को कुछ समय बाद बंद कर दिया जाता था, ताकि नए कनेक्शन के नाम पर मिलने वाले इंसेंटिव का फायदा उठाया जा सके।
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जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने टेलीकॉम कंपनियों की KYC प्रक्रिया में खामियों का फायदा उठाया और फर्जी तरीके से कई पॉइंट ऑफ सेल (POS) एजेंट आईडी भी बनाई थीं।
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बोनस और इंसेंटिव के लिए पूरा नेटवर्क
सूत्रों के अनुसार, आरोपी ने यह पूरा नेटवर्क सिर्फ इंसेंटिव कमाने के लिए तैयार किया था। वह अलग-अलग कंपनियों के सिम कार्ड एक्टिवेट करता और टारगेट पूरा होने के बाद उन्हें निष्क्रिय कर देता था। इस प्रक्रिया से उसे बार-बार बोनस मिलता रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला “डिजिटल पहचान के दुरुपयोग” का एक गंभीर उदाहरण है, जिसमें आधार और मोबाइल नंबर जैसी संवेदनशील जानकारी का गलत इस्तेमाल किया गया।

साइबर फ्रॉड का बढ़ता खतरा
देश में इस तरह के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। हाल ही में उत्तर प्रदेश और बिहार में भी फर्जी सिम कार्ड के जरिए करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के मामले सामने आए हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ बताते हैं कि फर्जी सिम कार्ड का उपयोग बैंक फ्रॉड, OTP चोरी और पहचान की जालसाजी जैसे अपराधों में किया जाता है।
जांच और कानूनी कार्रवाई
इंदौर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज किया है। मामले में यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल थे।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
यह घटना टेलीकॉम कंपनियों की KYC और वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक ही फोटो और दस्तावेजों से इतने बड़े स्तर पर सिम कार्ड एक्टिवेट होना सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों को रोकने के लिए मजबूत डिजिटल वेरिफिकेशन, बायोमेट्रिक जांच और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जरूरी है।



