देश में भीषण गर्मी के आगमन के साथ ही बिजली की मांग में तेज़ बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे संभावित ऊर्जा संकट की आशंका गहराने लगी है। विशेषज्ञों और विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, इस वर्ष गर्मियों में भारत की बिजली मांग 270 गीगावॉट के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती है। यह पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है और ऊर्जा व्यवस्था पर दबाव बढ़ा सकती है।
मांग में रिकॉर्ड वृद्धि
गर्मी के दौरान एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य बिजली उपकरणों के अधिक उपयोग के कारण बिजली खपत तेजी से बढ़ती है। शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी बिजली की पहुंच बढ़ने से कुल मांग में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। ऊर्जा मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, हर साल बिजली की मांग में औसतन 8-10 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है।
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कोयले पर बढ़ती निर्भरता
देश में बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा अभी भी कोयले पर आधारित है। मांग बढ़ने के साथ ही थर्मल पावर प्लांट्स पर निर्भरता और अधिक बढ़ गई है। हालांकि, कोयले की आपूर्ति और भंडारण को लेकर पहले भी कई बार संकट की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। यदि मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन नहीं बना, तो कई राज्यों में बिजली कटौती या ब्लैकआउट जैसी स्थिति बन सकती है।
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सरकार की तैयारियां
स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने सभी पावर प्लांट्स को पूरी क्षमता से संचालन करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, कोयला मंत्रालय और रेलवे को कोयले की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।



