सिंगरौली, 27 जून 2026। सरकारी विद्यालयों में पत्रकारों के प्रवेश को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय द्वारा जारी आदेश के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने अगले ही दिन स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि आदेश को गलत संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।
क्या कहा गया था पहले आदेश में?
25 जून 2026 को जारी आदेश में कहा गया था कि कुछ प्राचार्यों ने शिकायत की थी कि बिना सक्षम अनुमति पत्रकार एवं अन्य सामान्य व्यक्ति विद्यालयों में प्रवेश कर निरीक्षण अथवा शासकीय कार्यों में व्यवधान उत्पन्न करते हैं।

इसी आधार पर सभी संस्था प्रमुखों को निर्देश दिए गए कि बिना सक्षम अनुमति किसी भी सामान्य व्यक्ति को निरीक्षण के उद्देश्य से विद्यालय परिसर में प्रवेश न दिया जाए तथा आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
DEO ने अगले दिन जारी किया स्पष्टीकरण
26 जून 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने नया स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि उक्त आदेश का उद्देश्य किसी भी प्रकार से मीडिया की भूमिका को सीमित करना नहीं है।

स्पष्टीकरण में कहा गया कि आदेश केवल विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों की सुरक्षा, शांत शैक्षणिक वातावरण तथा शिक्षण कार्य को निर्बाध बनाए रखने के लिए जारी किया गया था।
मान्यता प्राप्त पत्रकारों पर नहीं है प्रतिबंध
स्पष्टीकरण में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मान्यता प्राप्त पत्रकारों को विद्यालयों में प्रवेश से वंचित नहीं किया गया है।
कार्यालय के अनुसार आदेश केवल कथित रूप से अनधिकृत या बिना अनुमति बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश को विनियमित करने के उद्देश्य से जारी किया गया था।
पारदर्शिता बनाए रखने की बात
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि वह स्वतंत्र एवं उत्तरदायी पत्रकारिता का सम्मान करता है तथा विद्यालयों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
साथ ही कार्यालय ने कहा कि यह व्यवस्था बालकों के निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विद्यालयों के सुरक्षित वातावरण के बीच संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से की गई है।
मीडिया संस्थानों से की गई यह अपील
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने सभी मान्यता प्राप्त मीडिया संस्थानों से अनुरोध किया है कि जारी स्पष्टीकरण को इसी संदर्भ में देखा जाए तथा आदेश की मंशा को गलत रूप में प्रस्तुत न किया जाए।





















