सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला : विधवा बहू को ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण का अधिकार

By: अजीत नारायण सिंह

On: Sunday, January 18, 2026 12:34 PM

Google News
Follow Us

विज्ञापन

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 13 जनवरी 2026 को एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि विधवा बहू को अपने दिवंगत ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण का अधिकार है, भले ही पति की मृत्यु ससुर के बाद हुई हो।

कंचना राय बनाम गीता शर्मा (2026 INSC 54) मामले में न्यायालय ने न केवल हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 (HAMA) की व्याख्या की, बल्कि मनुस्मृति के सिद्धांतों का भी संदर्भ देते हुए पारिवारिक उत्तरदायित्व को संवैधानिक मूल्यों से जोड़ा।

क्या था मामला?

यह विवाद डॉ. महेंद्र प्रसाद की संपत्ति को लेकर उत्पन्न हुआ। डॉ. प्रसाद का निधन 27 दिसंबर 2021 को हुआ था। उन्होंने 2011 में वसीयत बनाई थी। उनके तीन पुत्र थे….

  • राजीव शर्मा
  • देवेंद्र राय (जिनकी पत्नी कंचना राय थीं)
  • रंजीत शर्मा (जिनकी पत्नी गीता शर्मा थीं)

रंजीत शर्मा की मृत्यु 2 मार्च 2023 को हुई। इसके बाद उनकी पत्नी गीता शर्मा ने अपने ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण की मांग की।

परिवार न्यायालय ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि वह ससुर की मृत्यु के समय विधवा नहीं थीं।
हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस निर्णय को पलटते हुए उन्हें HAMA के तहत आश्रित माना।

इसके विरुद्ध कंचना राय और उमा देवी सुप्रीम कोर्ट पहुँचीं।

सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट व्याख्या

न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने कहा..

“धारा 21(vii) में ‘पुत्र की विधवा’ कहा गया है, न कि ‘पूर्व-मृत पुत्र की विधवा’। इसलिए समय-सीमा अप्रासंगिक है।”

कोर्ट ने कहा कि

  • धारा 22 के तहत उत्तराधिकारियों का दायित्व है कि वे आश्रित को भरण-पोषण दें
  • यदि विधवा को संपत्ति में हिस्सा नहीं मिला है, तो भरण-पोषण देना अनिवार्य है
  • अलग-अलग समय पर विधवा होने के आधार पर भेदभाव करना अनुच्छेद 14 (समानता) का उल्लंघन होगा

मनुस्मृति का उल्लेख क्यों किया गया?

कोर्ट ने अपने फैसले में मनुस्मृति अध्याय 8, श्लोक 389 का उल्लेख किया

“पिता, माता, पत्नी और पुत्र को त्यागना पाप है। जो ऐसा करे, वह दंड का पात्र है।”

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि

  • मनुस्मृति को कानून के रूप में नहीं, बल्कि नैतिक मार्गदर्शन के रूप में देखा गया
  • जब कानून मौन हो, तब पारिवारिक कर्तव्यों को समझने के लिए इसका सहारा लिया जा सकता है
  • यह संदर्भ महिला की गरिमा और संरक्षण के लिए दिया गया है, न कि किसी धार्मिक आदेश के रूप में

संविधान और सामाजिक न्याय का संतुलन

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि

  • यह फैसला अनुच्छेद 21 (सम्मानपूर्वक जीवन) की भावना को मजबूत करता है
  • विधवा को आर्थिक सुरक्षा देना सामाजिक जिम्मेदारी है
  • कानून का उद्देश्य कमजोर वर्गों को संरक्षण देना है

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मनुस्मृति को संविधान से ऊपर नहीं रखा गया, बल्कि उसे संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप व्याख्यायित किया गया।

न्यायपालिका और मनुस्मृति: बदलता दृष्टिकोण

पूर्व में भी अदालतें मनुस्मृति का संदर्भ देती रही हैं…

  • विमला बाई बनाम हीरालाल गुप्ता
  • नारंग बनाम नारंग (दिल्ली हाईकोर्ट)
  • झारखंड हाईकोर्ट (2024) में महिला अधिकारों पर टिप्पणी

डॉ. भीमराव अंबेडकर ने जहां मनुस्मृति की आलोचना की थी, वहीं उन्होंने इसके कुछ सामाजिक ढांचे को आधुनिक कानून में रूपांतरित भी किया था।

NEET UG 2026 Re-Exam से पहले NTA ने आधिकारिक WhatsApp Channel शुरू किया और नया Admit Card जारी किया।

NEET UG 2026 Re-Exam : NTA ने लॉन्च किया Official WhatsApp Channel, नया Admit Card जारी, फर्जी मैसेज से रहें सावधान

NEET UG 2026 Re-Exam से पहले National Testing Agency (NTA) ने अभ्यर्थियों के लिए अपना Official WhatsApp Channel शुरू किया है। इसके साथ ही पुनर्परीक्षा के लिए नया NEET UG 2026 Admit Card भी जारी कर दिया गया है। एजेंसी…

Read More

WhatsApp