व्हाइट हाउस सलाहकार पीटर नवारो का विवादित बयान: “ब्राह्मण भारतीयों से मुनाफा कमा रहे हैं”

Neeraj Sahu

Author | Updated: 01 Sep 2025, 02:00 PM IST | 1 min read
White House advisor Peter Navarro's controversial statement: "Brahmins are profiting from Indians"
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व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने भारत पर 50% टैरिफ की मांग की। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण भारतीयों की कीमत पर मुनाफा कमा रहे हैं और मोदी रूस-चीन के करीब जा रहे हैं।

अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने सोमवार को भारत पर सख्त आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि “ब्राह्मण भारतीय लोगों की कीमत पर मुनाफा कमा रहे हैं और इसे रोकना ज़रूरी है।” नवारो ने यह टिप्पणी अमेरिकी टीवी चैनल फॉक्स न्यूज़ के साक्षात्कार में कही। उन्होंने भारत से आयात पर 50% टैरिफ लगाने की मांग भी की।

पीटर नवारो ने भारत को “क्रेमलिन की धुलाईघर” कहते हुए आलोचना की। उनका कहना है कि भारत अमेरिकी हितों के खिलाफ रूस और चीन के साथ गठबंधन कर रहा है। उन्होंने भारत को “टैरिफ का महाराजा” बताया और कहा कि भारत विदेशी कंपनियों को बेचने नहीं देता। इसके कारण अमेरिका के मजदूर और करदाता नुकसान उठा रहे हैं।

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उन्होंने आगे कहा, “मोदी एक महान नेता हैं, लेकिन मैं नहीं समझता वह पुतिन और शी जिनपिंग के साथ क्यों जुड़े रहते हैं। भारतीयों को यह समझना होगा कि असली फायदा ब्राह्मण उठा रहे हैं।”

यह बयान तब आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाक़ात चर्चा में रही। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

नवारो का यह हमला ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की टैरिफ नीति को लेकर अमेरिका में ही विवाद चल रहा है। हाल ही में अपील न्यायालय ने Trump के टैरिफ को “अवैध” करार दिया था।

यह पहली बार नहीं है जब नवारो ने भारत को लेकर कड़ी बातें कही हों। कुछ दिन पहले ही उन्होंने भारत पर रूसी तेल से भारी मुनाफा कमाने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि भारतीय रिफाइनरियां रूस से सस्ता तेल खरीदकर यूरोप, अफ्रीका और एशिया को बेच रही हैं। उन्होंने इसे “क्रेमलिन का तेल मनी लॉन्ड्रोमैट” बताया था।

नवारो के हालिया बयान ने भारत-अमेरिका संबंधों में नई खटास डाल दी है। यह देखना होगा कि भारत सरकार इस विवाद पर आधिकारिक प्रतिक्रिया कब और कैसे देती है।

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