घर से निकाले गए बुजुर्ग माता-पिता को राहत, सिंगरौली एसडीएम का बड़ा फैसला

UTN Hindi ।। Digital Team

Author | Updated: 29 Jul 2026, 07:09 PM IST | 1 min read
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सिंगरौली। कभी जिन हाथों ने अपने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए दिन-रात मेहनत की, वही हाथ बुढ़ापे में सहारे की तलाश में प्रशासन के दरवाजे तक पहुंच गए। सिंगरौली में एक बुजुर्ग पिता की यह पीड़ा तब राहत में बदल गई, जब जिला प्रशासन ने उनकी शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें न्याय दिलाया।

कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे छोटेलाल शाह ने आरोप लगाया कि उनके दोनों पुत्र अरविन्द शाह और अजय शाह ने उनके साथ अमानवीय व्यवहार करते हुए उन्हें घर से बाहर निकाल दिया। वृद्धावस्था और आर्थिक असहायता के कारण उनके सामने भोजन, रहने और इलाज जैसी बुनियादी जरूरतों का भी संकट खड़ा हो गया था।

कलेक्टर के निर्देश पर तत्काल शुरू हुई कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने शिकायत को तत्काल एसडीएम न्यायालय भेजा। इसके बाद हल्का पटवारी से जांच कराई गई और दोनों पक्षों की सुनवाई की गई।

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जांच रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उपखंड अधिकारी (एसडीएम) सिंगरौली ने वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत अंतिम आदेश पारित किया।

हर महीने ₹4,000 भरण-पोषण देना होगा

एसडीएम के आदेश के अनुसार दोनों पुत्र अपने माता-पिता को ₹2,000-₹2,000, यानी कुल ₹4,000 प्रति माह भरण-पोषण भत्ता देंगे।

यह राशि प्रत्येक महीने की 10 तारीख तक नियमित रूप से देना अनिवार्य होगा।

सिर्फ पैसे नहीं, माता-पिता को साथ रखना भी होगा

अदालत ने केवल आर्थिक सहायता का ही आदेश नहीं दिया, बल्कि दोनों बेटों को यह भी निर्देश दिया कि वे अपने माता-पिता को सम्मानपूर्वक अपने साथ रखें और उनकी आवश्यकताओं का पूरा ध्यान रखें।

आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि भोजन, रहने की व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं और आवश्यक देखभाल सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी होगी।

आदेश नहीं माना तो होगी कानूनी कार्रवाई

एसडीएम न्यायालय ने आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दोनों पुत्र आदेश का पालन नहीं करते हैं या माता-पिता की उपेक्षा जारी रखते हैं, तो वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 की धारा 11 के तहत उनके खिलाफ वैधानिक और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

बुजुर्गों के अधिकारों की मिसाल बना फैसला

यह फैसला केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक संदेश भी है जो उपेक्षा और प्रताड़ना का सामना कर रहे हैं।

वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 ऐसे माता-पिता और बुजुर्गों को कानूनी संरक्षण देता है, ताकि वे सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जी सकें।

Frequently Asked Questions

सिंगरौली में बुजुर्ग पिता को किस मामले में न्याय मिला?

बुजुर्ग पिता ने आरोप लगाया था कि उनके बेटों ने उन्हें घर से निकाल दिया और उनका भरण-पोषण नहीं किया। शिकायत पर एसडीएम न्यायालय ने उनके पक्ष में आदेश दिया।

SDM ने बेटों को क्या आदेश दिया?

दोनों बेटों को हर महीने ₹2,000-₹2,000 यानी कुल ₹4,000 भरण-पोषण भत्ता देने और माता-पिता को सम्मानपूर्वक अपने साथ रखने का आदेश दिया गया है।

यह आदेश किस कानून के तहत दिया गया?

यह आदेश वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के प्रावधानों के तहत पारित किया गया है।

यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो क्या होगा?

आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित बेटों के खिलाफ अधिनियम की धारा 11 के तहत वैधानिक और दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

क्या अन्य वरिष्ठ नागरिक भी ऐसी शिकायत कर सकते हैं?

हाँ। यदि किसी वरिष्ठ नागरिक की उपेक्षा की जाती है या उनका भरण-पोषण नहीं किया जाता, तो वे संबंधित प्राधिकरण या जनसुनवाई के माध्यम से कानून के तहत राहत मांग सकते हैं।

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