नगर निगम वाहन घोटाला : तीन कर्मचारी निलंबित, प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

अजीत नारायण सिंह

Author | Updated: 06 Feb 2026, 09:19 AM IST | 1 min read
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वाराणसी। नगर निगम के परिवहन विभाग में गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय अनियमितता का मामला उजागर होने के बाद नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने कड़ा रुख अपनाया है। निर्धारित दस वर्ष की सेवा अवधि पूरी होने से पहले ही निगम के कई वाहनों को ‘डेड’ घोषित कर नीलामी सूची में शामिल किए जाने को गंभीर प्रशासनिक चूक मानते हुए परिवहन कार्यशाला विभाग के तीन कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। प्रकरण की विभागीय जांच अपर नगर आयुक्त अमित कुमार को सौंपी गई है, जिन्हें 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि नगर निगम की संपत्तियों के संरक्षण, रखरखाव और उपयोग से जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी, निलंबन अवधि के दौरान तीनों कर्मचारी जांच अधिकारी से संबद्ध रहेंगे।

नीलामी समिति में शामिल उपसभापति नरसिंह दास तथा पार्षद हनुमान प्रसाद और मदन मोहन दुबे द्वारा किए गए स्थलीय निरीक्षण में प्रशासनिक नियंत्रण की कमजोर तस्वीर सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2022 में खरीदी गई 25 ई-गार्बेज मशीनों को मात्र डेढ़ वर्ष में ही कबाड़ घोषित कर दिया गया। एक गोल्फ कार का केवल चेसिस पाया गया, जबकि उसके पहिए, इंजन और बैटरी गायब थे।

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रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि लगभग 10-10 लाख रुपये मूल्य की जटायु मशीनें और 75 लाख रुपये की स्वीपर मशीनों को बिना किसी विशेषज्ञ तकनीकी मूल्यांकन के डंपिंग यार्ड में डाल दिया गया। कार्यशाला में खड़ी कई गाड़ियों के इंजन, बैटरी और पहिए गायब मिले। नई जेसीबी और महिंद्रा वाहनों का कोई सर्विस रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था, जबकि टाटा एस की दो गाड़ियों पर डेढ़ लाख रुपये से अधिक मरम्मत खर्च होने के बावजूद उन्हें स्क्रैप सूची में शामिल कर दिया गया।

समिति की रिपोर्ट के आधार पर महापौर और नगर आयुक्त ने स्वयं डंपिंग यार्ड का निरीक्षण किया। इसके बाद प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए कनिष्ठ लिपिक वैभव शरण मिश्र, सौरभ सान्याल और नपेंद्र शंकर सिंह को निलंबित कर दिया गया। निलंबन आदेश में कहा गया है कि यह कृत्य कर्मचारी आचरण नियमावली के विपरीत है और इससे नगर निगम को वित्तीय क्षति के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी आघात पहुंचा है।

नगर आयुक्त ने संकेत दिए हैं कि जांच के आधार पर यदि अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई की जाएगी, ताकि नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और सुचारु बनाया जा सके।

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