जनवरी 2026 के अंत तक आते-आते भारत में सोने की कीमत ने आम लोगों की जेब पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि एक तोला सोना एक लाख रुपये के आसपास पहुंच चुका है। खासतौर पर शादी-विवाह के मौसम में यह बढ़ोतरी मध्यम वर्ग के लिए बड़ी परेशानी बन गई है।
RBI की रणनीति बनी कीमत बढ़ने की बड़ी वजह
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) पिछले दो वर्षों से लगातार सोना खरीद रहा है। आंकड़ों के अनुसार, भारत ने करीब 75 से 80 टन सोना बीते सालों में अपने भंडार में जोड़ा है।इसका उद्देश्य साफ है .
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- रुपये की गिरती कीमत को संभालना
- डॉलर पर निर्भरता कम करना
- विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित बनाना
लेकिन इसका सीधा असर बाजार में सोने की मांग पर पड़ा, जिससे कीमतें तेज़ी से बढ़ीं।
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अमेरिका और डॉलर फैक्टर
वैश्विक स्तर पर अमेरिका के पास अब भी 8,000 टन से ज्यादा सोना मौजूद है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। वहीं भारत के पास करीब 850 टन गोल्ड रिज़र्व है, जो पहले 600 टन के आसपास था।
अमेरिका लगातार डॉलर को मजबूत बनाए रखने की नीति पर काम कर रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सक्रिय होने और आर्थिक दबावों के कारण डॉलर को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। यही वजह है कि कई देश अब डॉलर छोड़कर सोने में निवेश बढ़ा रहे हैं।
चीन और रूस भी बदल रहे रणनीति
चीन और रूस ने भी अमेरिकी बॉन्ड खरीदना कम कर दिया है।इन देशों का फोकस अब गोल्ड रिज़र्व बढ़ाने पर है ताकि भविष्य में डॉलर आधारित दबाव से बचा जा सके।
यही वजह है कि
- सोने की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ी
- सप्लाई सीमित रही
- कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं
भारत क्यों ज्यादा प्रभावित हो रहा है?
भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में केवल करीब 15% हिस्सा सोने का है, जबकि बाकी डॉलर आधारित संपत्तियों में है।
जब डॉलर मजबूत होता है और गोल्ड महंगा होता है, तो भारत के पास संतुलन बनाने के विकल्प कम रह जाते हैं।
इसी कारण सरकार मजबूरी में लगातार सोना खरीद रही है, जिससे कीमतें और ऊपर जा रही हैं।
आम आदमी पर सीधा असर
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा नुकसान मध्यम वर्ग को हो रहा है। शादी-ब्याह के मौसम में लोग मंगलसूत्र तक खरीदने में असमर्थ हो रहे हैं। सोना जो कभी सुरक्षित निवेश माना जाता था, अब आम परिवारों की पहुंच से बाहर होता जा रहा है।
- मध्यम वर्गीय परिवारों पर
- शादी के गहनों पर
- मंगलसूत्र और चेन जैसी जरूरी खरीद पर
दुनिया के टॉप गोल्ड रिज़र्व देश (2026)
| देश | गोल्ड रिज़र्व |
|---|---|
| अमेरिका | 8,000+ टन |
| जर्मनी | ~3,300 टन |
| इटली | ~2,400 टन |
| रूस | ~2,300 टन |
| भारत | ~850 टन |



