सिंगरौली मे शिक्षा के मंदिर’ में भ्रष्टाचार की ‘क्लास’, अधिकारियों ने मिलकर डकारे 9 करोड़!

By: Om Prakash Shah

On: Monday, April 20, 2026 9:27 PM

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सिंगरौली। जिले के शिक्षा विभाग में सामग्री खरीदी और मरम्मत कार्यों के नाम पर हुए करोड़ों रुपए के महाघोटाले का भंडाफोड़ हुआ है। लोकायुक्त रीवा की टीम ने भ्रष्टाचार की शिकायतों की प्राथमिक जांच के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सहित चार आला अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। लोकायुक्त की इस कार्रवाई से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

जिले में बच्चों की पढ़ाई के बजट से अधिकारियों ने अपनी तिजोरियाँ भरने का ‘प्रैक्टिकल’ पास कर लिया है। जहाँ स्कूलों को चाक और डस्टर नसीब नहीं होते, वहाँ कागजों पर करोड़ों की सफाई और मरम्मत हो गई। लोकायुक्त ने अब DEO सूर्यभान सिंह और उनकी ‘टीम’ का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया है, जिसमें फेल होने पर सीधे जेल की तैयारी है। 558 स्कूलों में झाड़ू-पोछा लगाने के नाम पर 98 लाख का खेल बता रहा है कि साहब लोगों ने स्वच्छता अभियान को ही अपनी कमाई का जरिया बना लिया।

खरीद घोटाला- 19 स्कूलों के लिए आवश्यक सामग्री की खरीदी के नाम पर 4.68 करोड़ रुपए का संदिग्ध भुगतान किया गया।

बिजली एवं मरम्मत- 61 स्कूलों में बिजली फिटिंग और सामान्य मरम्मत के नाम पर 3.05 करोड़ रुपए के बिल पास किए गए।

सफाई सामग्री-  जिले के 558 स्कूलों में साफ-सफाई के सामान की आपूर्ति के नाम पर लगभग 98 लाख रुपए का भुगतान हुआ।

इन अधिकारियों पर गिरी गाज-

लोकायुक्त एसपी सुनील पाटीदार के निर्देशन में हुई इस कार्रवाई में विभाग के उन चेहरों को नामजद किया गया है, जिनकी कलम से भुगतान के आदेश जारी हुए थे। एफआईआर में शामिल मुख्य नाम हैं-

  • सूर्यभान सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO)
  • ​राजधर साकेत, सहायक संचालक
  • ​रामलखन शुक्ल, जिला परियोजना समन्वयक (DPC)
  • ​छविलाल सिंह, वित्त विभाग

दस्तावेज जब्त-

​मामला दर्ज करने के तुरंत बाद लोकायुक्त की एक विशेष टीम ने सिंगरौली स्थित शिक्षा विभाग के कार्यालय में छापा मारा। टीम ने घंटों चली कार्रवाई के बाद टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी फाइलें, भुगतान किए गए बिल, सप्लाई ऑर्डर और बैंक ट्रांजैक्शन से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया महज एक औपचारिकता थी। न तो सामान की गुणवत्ता जांची गई और न ही स्कूलों में सामान की भौतिक आपूर्ति सुनिश्चित की गई। कई मामलों में तो बाजार दर से कई गुना अधिक कीमतों पर भुगतान दिखाए गए हैं। लोकायुक्त अब उन ठेकेदारों और फर्मों की भी कुंडली खंगाल रहा है जिन्हें यह मोटा भुगतान किया गया है।

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