सिंगरौली। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, नई दिल्ली के अध्यक्ष श्री अंतर सिंह आर्य की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में वन प्रबंधन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक के प्रारंभ में वन मंडल अधिकारी श्री अखिल बंसल ने आयोग अध्यक्ष एवं सदस्यों का स्वागत करते हुए वन मंडल से संबंधित सामान्य जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिले में संयुक्त वन प्रबंधन के अंतर्गत 67 वन सुरक्षा समितियां एवं 215 ग्राम वन समितियां गठित हैं। कुल 282 समितियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं सामान्य वर्ग के हजारों सदस्य सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं, जिनमें महिलाओं की सहभागिता उल्लेखनीय है।
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित वन प्रबंधन समिति की बैठक केवल प्रशासनिक समीक्षा नहीं रही, बल्कि वन और वनवासी के बीच संतुलन की सोच को मजबूती देने वाला संवाद बन गई। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, नई दिल्ली के अध्यक्ष श्री अंतर सिंह आर्य की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में अधिकार, आजीविका और संरक्षण—तीनों पहलुओं पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक की शुरुआत वन मंडल अधिकारी श्री अखिल बंसल द्वारा जिले की वन संरचना और संयुक्त वन प्रबंधन समितियों की जानकारी के साथ हुई। बताया गया कि जिले में 67 वन सुरक्षा समितियां और 215 ग्राम वन समितियां सक्रिय हैं, जिनमें बड़ी संख्या में अनुसूचित जनजाति समुदाय की सहभागिता है। यह सहभागिता वन संरक्षण में समुदाय की भूमिका को दर्शाती है। वन अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दावों पर चर्चा करते हुए आयोग अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि पात्र हितग्राहियों को अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा। उन्होंने निरस्त और लंबित दावों की पुनः समीक्षा के निर्देश देते हुए कहा कि निर्णय मानवीय दृष्टिकोण से किए जाएं। तेंदूपत्ता संग्रहण और वनोपज को वनवासियों की आजीविका से जोड़ते हुए बताया गया कि वर्ष 2025 के सीजन में करोड़ों रुपये का सीधा भुगतान श्रमिकों को किया गया। इसके साथ ही तेंदूपत्ता लाभांश से कराए गए विकास कार्यों ने ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं को मजबूत किया है।
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