सिंगरौली। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, नई दिल्ली के अध्यक्ष की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की शुरुआत में कलेक्टर श्री बैनल ने जिले की भौगोलिक स्थिति, प्रशासनिक इकाइयों, कोयला व पावर परियोजनाओं तथा 2011 जनगणना के अनुसार आदिवासी जनसंख्या की जानकारी दी। साथ ही जनजाति कार्य विभाग में स्वीकृत, भरे एवं रिक्त पदों की स्थिति से आयोग को अवगत कराया गया।
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक केवल औपचारिक आंकड़ों की प्रस्तुति नहीं रही, बल्कि जनजातीय समाज से जुड़े मुद्दों पर गहन मंथन का मंच बनी। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, नई दिल्ली के अध्यक्ष की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रशासन, पुलिस, वन विभाग और पंचायत व्यवस्था एक साथ नजर आई। बैठक की शुरुआत जिले की भौगोलिक तस्वीर से हुई—जहाँ खनन और ऊर्जा परियोजनाओं के बीच जनजातीय आबादी का जीवन आकार ले रहा है। कलेक्टर श्री गौरव बैनल ने आयोग को जिले की वास्तविक स्थिति से अवगत कराते हुए आदिवासी जनसंख्या, परियोजनाओं के प्रभाव और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। शिक्षा, छात्रवृत्ति, आवास, छात्रावास, आश्रम और स्वरोजगार योजनाओं की समीक्षा के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि योजनाओं की प्रगति के साथ-साथ निगरानी और संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी है। कन्या शिक्षा परिसर और एकलव्य विद्यालयों की जानकारी ने जनजातीय शिक्षा की दिशा में हो रहे प्रयासों को रेखांकित किया। बैठक में अत्याचार निवारण अधिनियम, वन अधिकार कानून और पीएम जनमन जैसी योजनाओं पर चर्चा के दौरान आयोग अध्यक्ष ने दो टूक कहा कि “योजनाएं तभी सार्थक होंगी, जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।” स्वास्थ्य के मुद्दे पर सिकल सेल एनीमिया को गंभीर चुनौती बताते हुए अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि मजरे-टोलों तक पहुँचकर शिविर लगाए जाएँ, केवल अस्पतालों तक सीमित न रहा जाए। उन्होंने काउंसलिंग, उपचार, टीकाकरण और पोषण को एक साथ जोड़ने पर जोर दिया।
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