भारत की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड स्थित ऐशमोलियन म्यूजियम ने 16वीं सदी की एक दुर्लभ कांस्य मूर्ति भारत को लौटाने का फैसला किया है। यह मूर्ति तमिलनाडु के एक प्राचीन मंदिर से जुड़ी बताई जा रही है।
यह कदम भारत की सांस्कृतिक धरोहर को वापस लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में कई देशों ने भारत से चोरी या अवैध तरीके से बाहर गई प्राचीन मूर्तियों को वापस करने की प्रक्रिया तेज की है।
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तमिलनाडु के मंदिर से जुड़ी है मूर्ति
मिली जानकारी के अनुसार यह कांस्य मूर्ति दक्षिण भारत के संत तिरुमंगई अलवार की मानी जाती है। यह मूर्ति तमिलनाडु के श्री सौंदरराजा पेरुमल मंदिर से जुड़ी बताई गई है। शोध के दौरान इसकी असली उत्पत्ति का पता चलने के बाद म्यूजियम ने इसे भारत को लौटाने का निर्णय लिया।
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बताया जाता है कि यह मूर्ति करीब 57.5 सेंटीमीटर ऊंची है और 1967 में एक नीलामी के जरिए ऑक्सफोर्ड के ऐशमोलियन म्यूजियम के संग्रह में पहुंच गई थी। उस समय म्यूजियम ने इसे अच्छे विश्वास के साथ खरीदा था, लेकिन बाद में इसकी असली पहचान सामने आई।

लंदन में भारतीय अधिकारियों को सौंपी गई मूर्ति
हाल ही में लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में आयोजित एक कार्यक्रम में इस मूर्ति को औपचारिक रूप से भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया गया। इसके बाद इसे भारत लाकर तमिलनाडु के संबंधित मंदिर में स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत वापस ला रहा
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने विदेशों से कई प्राचीन मूर्तियां और कलाकृतियां वापस हासिल की हैं। विभिन्न देशों के संग्रहालय अब अपनी संग्रहित वस्तुओं की उत्पत्ति की जांच कर रहे हैं।
इसी प्रक्रिया के तहत ऑक्सफोर्ड म्यूजियम का यह फैसला भी भारत की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को सम्मान के साथ वापस लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



