नई दिल्ली। संचार और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) पर बनी संसदीय स्थायी समिति की बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Meta, X और YouTube की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम, कंटेंट मॉडरेशन और भारतीय कानूनों के पालन को लेकर समिति ने चिंता व्यक्त की है।
Algorithmपर उठाए सवाल
निशिकांत दुबे ने दावा किया कि प्रमुख राजनीतिक दलों—भाजपा, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी—की संयुक्त व्यूअरशिप एल्गोरिदम लगभग 23–24 मिलियन तक सीमित है, जबकि कुछ ऐसे समूह, जो न तो पंजीकृत राजनीतिक दल हैं और न ही पंजीकृत गैर-सरकारी संगठन (NGO), उनसे अधिक पहुंच हासिल कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि समिति यह समझना चाहती है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम किस आधार पर कंटेंट को प्राथमिकता देता है।
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प्रधानमंत्री के कंटेंट का भी किया जिक्र
भाजपा सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े कंटेंट के हटाए जाने का मुद्दा भी बैठक में उठा। उनका दावा था कि Meta ने पहले भी प्रधानमंत्री का कंटेंट हटाया था और बाद में यह स्वीकार किया गया कि वह कुछ समय तक प्लेटफॉर्म से गायब रहा।
उन्होंने कहा कि समिति का मानना है कि यदि ऐसा हुआ है, तो यह गंभीर विषय है।
#WATCH | दिल्ली: कम्युनिकेशन और IT पर बनी संसदीय स्थायी समिति की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद, समिति के चेयरमैन और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, “…जो एल्गोरिदम है, उसमें जो स्थिति बनी है, उसे समझें। मेटा इंडिया, ‘X’ और यूट्यूब ने जो किया, वह देश के जानने लायक है। अगर आप… pic.twitter.com/RgQn4dsL7Y
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 3, 2026
Mark Zuckerberg से माफी की मांग
निशिकांत दुबे ने कहा कि समिति ने Meta के प्रमुख मार्क ज़करबर्ग से सार्वजनिक माफी की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो कंपनी के ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) संरक्षण की समीक्षा की जानी चाहिए।
CSAM और कंटेंट मॉडरेशन पर भी चिंता
समिति अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज़ मटेरियल (CSAM) और महिलाओं से जुड़े कुछ आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने में भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर्याप्त तत्परता नहीं दिखाते।
उन्होंने कहा कि भारत के IT नियम इस मामले में स्पष्ट हैं और प्लेटफॉर्म को उनका पालन करना चाहिए।
क्या है ‘Meta Safe Harbour’?
सेफ हार्बर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाला एक कानूनी संरक्षण है। इसके तहत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए कुछ परिस्थितियों में सीमित दायित्व से सुरक्षा मिलती है, बशर्ते वे कानून और निर्धारित नियमों का पालन करें।
Frequently Asked Questions
निशिकांत दुबे ने किस मुद्दे पर बयान दिया?
उन्होंने Meta, X और YouTube के एल्गोरिदम, कंटेंट मॉडरेशन और 'सेफ हार्बर' संरक्षण पर सवाल उठाए।
क्या है 'Meta Safe Harbour'?
यह IT Act की धारा 79 के तहत मिलने वाला कानूनी संरक्षण है, जो कुछ शर्तों के तहत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को उपयोगकर्ता द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट की जिम्मेदारी से सीमित सुरक्षा देता है।
मार्क ज़करबर्ग से क्या मांग की गई?
निशिकांत दुबे ने कहा कि Meta प्रमुख मार्क ज़करबर्ग को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
क्या Meta ने इस पर प्रतिक्रिया दी है?
समाचार लिखे जाने तक Meta की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



