भोपाल/दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने अपनी सीट बरकरार रखते हुए बड़ी जीत दर्ज की है। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों के अंतर से हराकर विधानसभा पहुंचने में सफलता हासिल की।
3 अगस्त को हुई मतगणना में शुरुआती दौर से ही घनश्याम सिंह बढ़त बनाए रहे और अंतिम परिणाम तक यह बढ़त कायम रही। जीत के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है।
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71.44% हुआ था मतदान
दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान हुआ था, जिसमें 71.44 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला रहा, जबकि आजाद समाज पार्टी के दामोदर सिंह यादव सहित कुल 21 उम्मीदवार मैदान में थे।
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क्यों हुए थे दतिया में उपचुनाव?
यह उपचुनाव कांग्रेस के तत्कालीन विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद कराया गया। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में राजेंद्र भारती ने भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा को हराया था।
हालांकि, अप्रैल 2026 में दिल्ली की एक अदालत ने धोखाधड़ी के एक मामले में राजेंद्र भारती को तीन वर्ष की सजा सुनाई, जिसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई और सीट रिक्त होने पर उपचुनाव कराया गया।
दोनों दलों के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, दतिया का उपचुनाव कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया था।
इस चुनाव पर पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी नजरें थीं, क्योंकि भाजपा ने इस बार उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया। वहीं, यह चुनाव मध्य प्रदेश भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की पहली बड़ी चुनावी परीक्षा भी माना जा रहा था।
कांग्रेस के लिए मनोबल बढ़ाने वाली जीत
दतिया सीट पर जीत के साथ कांग्रेस ने अपना कब्जा बरकरार रखा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम राज्य की राजनीति में कांग्रेस के लिए मनोबल बढ़ाने वाला साबित हो सकता है, जबकि भाजपा आगामी चुनावी रणनीति की समीक्षा कर सकती है।
Frequently Asked Questions
दतिया विधानसभा उपचुनाव कौन जीता?
कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने चुनाव जीता।
घनश्याम सिंह ने कितने वोटों से जीत दर्ज की?
उन्होंने भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराया
इस चुनाव का राजनीतिक महत्व क्या है?
यह चुनाव कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए प्रतिष्ठा का विषय था। साथ ही इसे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की पहली चुनावी परीक्षा और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक भविष्य से भी जोड़कर देखा जा रहा था।



