नोएडा के सेक्टर-150 में हुए दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 26 वर्षीय टेक प्रोफेशनल युवराज मेहता की मौत के मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है। इस हादसे के प्रत्यक्षदर्शी बताए जा रहे फ्लिपकार्ट डिलीवरी कर्मचारी मोनिंदर ने अपने बयान में बड़ा बदलाव किया है।
कैसे हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, 21 जनवरी 2026 की रात घने कोहरे के बीच युवराज मेहता की कार अनियंत्रित होकर एक निर्माणाधीन साइट की कमजोर बाउंड्री तोड़ते हुए पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी। बताया गया कि यह गड्ढा काफी गहरा था और उसमें पानी भरा हुआ था, जिससे युवराज बाहर नहीं निकल सके।
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पहले बयान में लगाए थे गंभीर आरोप
घटना के तुरंत बाद मीडिया से बातचीत में मोनिंदर ने पुलिस, SDRF और फायर ब्रिगेड पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था, कि युवक करीब डेढ़ घंटे तक मदद के लिए चिल्लाता रहा, लेकिन मौके पर मौजूद टीमें ठंडे पानी और लोहे की सरियों का हवाला देकर अंदर नहीं उतरीं। यदि समय पर रेस्क्यू होता तो युवक की जान बच सकती थी। मोनिंदर ने यह भी कहा था कि, अंत में वह खुद रस्सी बांधकर पानी में उतरा, लेकिन तब तक युवक की मौत हो चुकी थी।
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अब बदला बयान, वीडियो में कही नई बात
हालांकि, कुछ ही समय बाद मोनिंदर का एक नया वीडियो सामने आया, जिसने पूरे मामले को पलट कर रख दिया। इस वीडियो में उन्होंने कहा कि
- पुलिस 15 मिनट के भीतर मौके पर पहुंच गई थी
- SDRF, NDRF और फायर ब्रिगेड समय पर पहुंचे
- घने कोहरे के कारण कार और युवक को देख पाना मुश्किल था
- रेस्क्यू टीम ने पूरी कोशिश की और शव को बाहर निकाला
यह वीडियो किसी मीडिया सवाल-जवाब का हिस्सा नहीं था, बल्कि खुद रिकॉर्ड किया गया बयान था, जिसे सोशल मीडिया पर शेयर किया गया।
सोशल मीडिया पर उठे सवाल
मोनिंदर के बदले हुए बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कई यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि क्या पुलिस की पूछताछ या दबाव के बाद बयान बदला गया? वहीं कुछ लोग इसे “सच छिपाने की कोशिश” बता रहे हैं।
परिजनों का आरोप बरकरार
युवराज के पिता राजकुमार मेहता पहले ही प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा चुके हैं। उनका कहना है कि अगर समय पर रेस्क्यू होता तो उनका बेटा आज जिंदा होता। परिवार ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
जांच के घेरे में पूरा मामला
अब यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं रह गया है, बल्कि
- रेस्क्यू ऑपरेशन की टाइमिंग
- प्रशासनिक लापरवाही
- गवाह के बदले बयान
- निर्माण स्थल की सुरक्षा, जैसे कई पहलुओं पर जांच की मांग तेज हो गई है।
नोएडा का यह मामला न सिर्फ एक युवा की दर्दनाक मौत की कहानी है, बल्कि यह सिस्टम की कार्यशैली पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब सबकी नजर प्रशासनिक जांच रिपोर्ट और CCTV फुटेज पर टिकी है, जिससे यह साफ हो सके कि सच क्या है और जिम्मेदार कौन।



