मध्य प्रदेश सरकार वित्तीय वर्ष 2027-28 से राज्य की बजट व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। सरकार का लक्ष्य बजट प्रणाली को अधिक पारदर्शी, व्यावहारिक और आधुनिक बनाना है। इसी दिशा में लंबे समय से चले आ रहे और अब अप्रासंगिक माने जा रहे 74 बजट हेड (Budget Heads) को समाप्त करने की योजना बनाई गई है।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो इसका असर मंत्रियों और विधायकों को मिलने वाले कई पारंपरिक भत्तों और विशेष सुविधाओं पर भी पड़ेगा।
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74 बजट हेड हटाने की तैयारी
सरकार ने बजट प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए मौजूदा बजट मदों की समीक्षा की है। समीक्षा के बाद ऐसे बजट हेड चिन्हित किए गए हैं, जिनकी वर्तमान समय में आवश्यकता नहीं मानी जा रही है।
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सरकार का मानना है कि इन पुराने प्रावधानों को हटाने से
- बजट संरचना सरल होगी।
- सरकारी खर्च की निगरानी आसान होगी।
- वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा मिलेगा।
- संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।
मंत्रियों और विधायकों के भत्तों पर पड़ेगा असर
हटाए जाने वाले 74 बजट हेड में से करीब 15 बजट मदें ऐसी बताई जा रही हैं, जो सीधे तौर पर मंत्रियों और विधायकों के व्यक्तिगत एवं प्रशासनिक खर्चों से जुड़ी हैं। सरकार इन खर्चों को तर्कसंगत (Rationalize) बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

किन-किन भत्तों पर लग सकती है रोक?
प्रस्तावित बदलावों के तहत जिन पारंपरिक सुविधाओं और भत्तों को समाप्त किए जाने की चर्चा है, उनमें शामिल हैं
- कपड़े धुलवाने (धोबी) का भत्ता
- बाल कटवाने (नाई) का भत्ता
- भोजन भत्ता
- त्योहार अग्रिम (Festival Advance)
- अनाज अग्रिम (Grain Advance)
- अवकाश यात्रा (Leave Travel) से जुड़े प्रावधान
- प्रतिनिधित्व व्यय (Representation Expenses) से जुड़े कुछ प्रावधान
इनमें से कई सुविधाएं वर्षों से बजट का हिस्सा रही हैं।
बजट व्यवस्था होगी अधिक आधुनिक
राज्य सरकार का कहना है कि समय के साथ बजट प्रणाली में बदलाव आवश्यक है। पुराने और अप्रासंगिक खर्चों को समाप्त कर बजट को अधिक परिणामोन्मुख (Result-Oriented) बनाया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य सरकारी धन का बेहतर उपयोग और वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करना है।
2027-28 के बजट में दिख सकता है असर
सरकार की योजना के अनुसार, यदि सभी प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है, तो वित्तीय वर्ष 2027-28 के बजट में इन बदलावों का प्रभाव दिखाई देगा।
इसके बाद मंत्रियों और विधायकों से जुड़े कई पारंपरिक भत्ते समाप्त हो सकते हैं और राज्य की बजट व्यवस्था अधिक व्यवस्थित एवं पारदर्शी स्वरूप में सामने आ सकती है।



