लोकसभा में औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक 2026 पारित

लोकसभा ने 12 फ़रवरी 2026 को औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक पारित किया। संशोधन का मकसद 1926-1947 के पुराने श्रम कानूनों की निरंतरता सुनिश्चित कर कानूनी जटिलताओं को खत्म करना है। इस रिपोर्ट में विधेयक की मुख्य बातें, संदर्भ, और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ विस्तार से पढ़ें।

अजीत नारायण सिंह

Author | Updated: 12 Feb 2026, 11:26 PM IST | 1 min read
Industrial Relations Code Amendment Bill
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आज 12 फ़रवरी 2026 को लोकसभा में औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से मंज़ूरी दे दी गई। इसके बाद राज्यसभा ने भी इसी विधेयक को अनुमोदित करते हुए संसद में पारित होने की प्रक्रिया पूरी कर दी है।

यह संशोधन विधेयक मूल रूप से औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 को कानूनी स्पष्टता प्रदान करने के उद्देश्य से लाया गया है। इसके तहत वह विवादित स्थिति हल करने का प्रयास किया गया है जहाँ 2020 के कोड द्वारा निरस्त किए गए ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926, औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946, और औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 जैसे पुराने कानूनों की निरंतरता को लेकर भविष्य में न्यायिक/व्यवहारिक अनिश्चितता हो सकती थी।

मुख्य उद्देश्य 

इस संशोधन का महत्वपूर्ण उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 2020 में प्रभावी हुए श्रम कोड के अंतर्गत पुराने कानूनों का निरस्तीकरण स्पष्ट रूप से वैधानिक आधार पर हो, न कि केवल कार्यकारिणी नोटिफिकेशन के आधार पर, जिससे भविष्य में संभावित कानूनी विवादों से बचा जा सके।

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सरकार का तर्क है कि यह कदम औद्योगिक संबंधों के फ्रेमवर्क में स्थिरता लाएगा और श्रमिकों तथा नियोक्ताओं के बीच स्पष्ट नियमों की स्थापना करेगा। केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री ने सदन में कहा कि यह संशोधन ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के साथ-साथ श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए भी आवश्यक है।

संसद में बहस और प्रतिक्रियाएँ

विधेयक पर चर्चा के दौरान कुछ विपक्षी दलों ने इसे पर्याप्त श्रमिक सुरक्षा का साधन नहीं बताया और बेरोज़गारी व रोजगार सुरक्षा जैसे मुद्दे उठाए गए। उनका कहना था कि इस तरह के विधेयक में रोजगार संरक्षण के प्रावधानों को मजबूत करना चाहिए। इसके विपरीत केन्द्र सरकार ने स्पष्ट किया कि संशोधन केवल कोड की कानूनी संरचना को स्पष्ट करने के लिए है न कि श्रम अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास।

लोकसभा अपडेट | 12 फरवरी 2026

क्या हुआ?

लोकसभा और राज्यसभा ने औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक 2026 को पारित कर दिया।

क्यों लाया गया यह संशोधन?

पुराने श्रम कानूनों को लेकर भविष्य में कानूनी विवाद न हो, इसलिए।

  1. ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926
  2. औद्योगिक रोजगार अधिनियम, 1946
  3. औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947

इनकी जगह पहले ही औद्योगिक संबंध संहिता 2020 लागू हो चुकी है। अब संशोधन से इसकी कानूनी स्थिति और स्पष्ट हो गई है।

आम लोगों पर क्या होगा असर?

• कर्मचारियों और कंपनियों के नियम स्पष्ट
• कोर्ट केस और कानूनी भ्रम कम होंगे
• इंडस्ट्री में स्थिरता बढ़ेगी
• श्रमिक-नियोक्ता संबंध बेहतर करने का दावा

सरकार का कहना

“यह कदम श्रम कानूनों को सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाएगा।”

विपक्ष की चिंता

“श्रमिक सुरक्षा और रोजगार संरक्षण पर और मजबूत प्रावधान होने चाहिए।”

साधारण भाषा में समझें 

संसद ने 12 फरवरी 2026 को औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक पास कर दिया। इसका मकसद यह है कि पुराने श्रम कानूनों और नए श्रम कोड के बीच किसी तरह की कानूनी गड़बड़ी न रहे। पहले तीन पुराने कानूनों की जगह 2020 में नया कोड आया था, लेकिन उनकी निरंतरता को लेकर भ्रम था। अब यह संशोधन उस भ्रम को खत्म करता है। इससे कंपनियों और कर्मचारियों दोनों के लिए नियम साफ होंगे और भविष्य में कानूनी विवाद कम होंगे।

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