मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क से बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। 28 फरवरी 2026 को अफ्रीका के बोत्सवाना से 8 नए चीते सफलतापूर्वक कूनो नेशनल पार्क पहुंच गए हैं। यह कदम भारत में चल रहे “प्रोजेक्ट चीता” का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
इन चीतों ने लगभग 7000 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया। ग्वालियर एयरबेस पर उतरने के बाद इन्हें विशेष हेलीकॉप्टर से कूनो नेशनल पार्क लाया गया। पार्क पहुंचने के बाद इन चीतों को विशेष रूप से तैयार किए गए बाड़ों में रखा गया है, ताकि वे नए वातावरण में सुरक्षित रूप से ढल सकें।
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पर्यटन के लिए बड़ी खुशखबरी
कूनो नेशनल पार्क पहले से ही देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुका है। अब नए चीतों के आने से यहां पर्यटन गतिविधियों में और तेजी आने की उम्मीद है। पर्यटक अब ज्यादा संख्या में सफारी के लिए कूनो पहुंच रहे हैं। इससे स्थानीय रोजगार और पर्यटन उद्योग को भी फायदा होगा।
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वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसी नेशनल पार्क में दुर्लभ प्रजातियों की संख्या बढ़ती है, तो वहां की अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होती है। इससे होटल, गाइड, सफारी और स्थानीय व्यापार को सीधा लाभ मिलता है।
जैव विविधता संरक्षण में ऐतिहासिक कदम
भारत में चीते लगभग 70 साल पहले विलुप्त हो चुके थे। प्रोजेक्ट चीता के तहत अफ्रीका से चीतों को लाकर फिर से बसाने का प्रयास किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में चीतों की स्थायी आबादी विकसित करना और पारिस्थितिकी संतुलन को मजबूत करना है।

वन विभाग के अनुसार, नए चीतों के आने से कूनो में चीता संरक्षण मिशन को और मजबूती मिलेगी। यह कदम वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा
कूनो नेशनल पार्क में बढ़ती वन्यजीव गतिविधियों से आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन आधारित रोजगार बढ़ रहा है। होटल, सफारी गाइड, वाहन चालक और स्थानीय दुकानदारों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कूनो नेशनल पार्क भारत का प्रमुख वन्यजीव पर्यटन केंद्र बन सकता है। इससे मध्य प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी।
भविष्य के लिए उम्मीद की नई किरण
नए चीतों के आगमन से प्रोजेक्ट चीता को नई गति मिली है। वन विभाग लगातार इन चीतों की निगरानी कर रहा है। आने वाले समय में इन चीतों को जंगल में छोड़ने की योजना भी बनाई जा रही है।
कूनो नेशनल पार्क अब केवल वन्यजीव संरक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि पर्यटन और पर्यावरण संतुलन का प्रतीक बनता जा रहा है। यह पहल भारत के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।



