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जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर रमेश बिधूड़ी के ‘पंचर वाले’ बयान पर विवाद, NEET आंदोलन को लेकर बढ़ी सियासत

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी ने NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन को लेकर 'पंचर वाले' टिप्पणी की, जिस पर विवाद खड़ा हो गया। जानिए पूरा मामला और बयान पर क्या प्रतिक्रियाएं आईं।

UTN Hindi ।। Digital Team

Author | Updated: 04 Aug 2026, 10:09 AM IST | 1 min read
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नई दिल्ली। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी ने कथित NEET पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन को लेकर एक बयान दिया है, जिस पर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। अपने संबोधन में उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन में छात्रों से अधिक संख्या “पंचर बनाने वालों और ताला बनाने वालों” की थी। उनके इस बयान की विपक्षी दलों और कई सामाजिक समूहों ने आलोचना की है।

क्या कहा रमेश बिधूड़ी ने?

दिल्ली में आयोजित बीजेपी के ‘Gen Z Summit’ कार्यक्रम में रमेश बिधूड़ी ने कहा कि प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ऐसे लोग मौजूद थे जो छात्र नहीं थे।

उन्होंने कहा कि वहां 20,000 से 50,000 लोगों को इकट्ठा किया गया था और छात्रों की तुलना में “पंचर ठीक करने वाले” और “ताला बनाने वाले” अधिक थे।

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उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके परिवार के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए गए।

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‘पंचर वाला’ शब्द पर क्यों हुआ विवाद?

आलोचकों का कहना है कि हाल के वर्षों में “पंचर वाला” और “ताला बनाने वाला” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कुछ राजनीतिक भाषणों में मुस्लिम समुदाय के लिए अपमानजनक या रूढ़िवादी संदर्भ में किया गया है।

इसी वजह से बिधूड़ी की टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में विवाद बढ़ गया।

प्रधानमंत्री मोदी का पहले आया था बयान

यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्र आंदोलन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ लगाए गए आपत्तिजनक नारों पर प्रतिक्रिया दी थी।

प्रधानमंत्री ने कहा था कि उन्हें उन नारों से दुख पहुंचा है, लेकिन उन्होंने लोगों से अपील की थी कि “गुमराह युवाओं को माफ कर उन्हें सही रास्ता दिखाया जाए।”

पहले भी विवादों में रहे हैं बिधूड़ी

रमेश बिधूड़ी इससे पहले भी कई विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहे हैं।

  • 2023 में लोकसभा के दौरान तत्कालीन बसपा सांसद दानिश अली के खिलाफ उनकी टिप्पणी पर व्यापक विवाद हुआ था। बाद में कुछ शब्द संसदीय रिकॉर्ड से हटा दिए गए थे और बीजेपी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
  • 2020 में उन्होंने कोविड-19 के दौरान अभिवादन के तरीकों को लेकर दिए गए बयान के कारण भी सुर्खियां बटोरी थीं।

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