मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका ने दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम पर सहमति जताई है। इस समझौते के तहत होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही फिर शुरू होगी, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
कैसे हुआ समझौता?
यह युद्धविराम ऐसे समय में हुआ जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य नहीं खोला, तो गंभीर परिणाम होंगे।
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इसके बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की मध्यस्थता में दोनों देशों ने 2 हफ्ते के सीजफायर पर सहमति बनाई, जो तुरंत प्रभाव से लागू हो गया।
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ईरान और अमेरिका की शर्तें
अमेरिका ने कहा है कि वह दो सप्ताह तक ईरान पर हमले रोकेगा, बशर्ते ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोल दे।
वहीं ईरान ने 10 बिंदुओं की योजना पेश की है, जिसमें
- क्षेत्रीय युद्ध पूरी तरह रोकने की मांग
- आर्थिक प्रतिबंध हटाने की शर्त
- जब्त संपत्तियों की वापसी
- परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता शामिल है
इज़राइल का क्या रुख है?
इज़राइल ने इस युद्धविराम को आंशिक समर्थन दिया है, लेकिन साफ किया है कि यह समझौता लेबनान पर लागू नहीं होगा।
इज़राइल का कहना है कि जब तक हिज़्बुल्लाह से खतरा खत्म नहीं होता, उसकी कार्रवाई जारी रहेगी।
आगे क्या होगा?
अब पाकिस्तान ने दोनों देशों को इस्लामाबाद में आगे की बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी समझौता करना आसान नहीं होगा क्योंकि दोनों देशों की शर्तें अलग-अलग हैं।
FAQ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. Iran US ceasefire : यह युद्धविराम कितने समय के लिए है?
यह फिलहाल 2 सप्ताह के लिए अस्थायी रूप से लागू किया गया है।
Q2. होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) क्यों महत्वपूर्ण है?
यह दुनिया का प्रमुख तेल आपूर्ति मार्ग है, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित होता है।
Q3. क्या यह स्थायी शांति की शुरुआत है?
अभी कहना मुश्किल है, क्योंकि दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
Q4. भारत पर इसका क्या असर होगा?
तेल की कीमतों में कमी और आर्थिक स्थिरता की संभावना बढ़ेगी।



