मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर एक बार फिर सुर्खियों में है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। शनिवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
राहुल गांधी ने अस्पताल में भर्ती मरीजों से मुलाकात की और शोक संतप्त परिवारों को ढांढस बंधाया। इसके बाद उन्होंने राज्य सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला।
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सिस्टम की नाकामी है – राहुल गांधी
भागीरथपुरा में पत्रकारों से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा..
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“यह कैसी स्मार्ट सिटी है, जहां लोगों को पीने का साफ पानी तक नहीं मिल रहा?
यहां पानी नहीं, ज़हर बांटा गया और प्रशासन गहरी नींद में सोता रहा।”Advertisement
उन्होंने कहा कि इस हादसे ने सरकार के विकास के दावों की पोल खोल दी है। लोगों के मन में डर और असुरक्षा का माहौल है, जिसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर प्रशासन की बनती है।
इंदौर में हमें स्मार्ट सिटी का वादा किया गया था। यह स्मार्ट सिटी का नया मॉडल है, जहां पीने का पानी नहीं है और लोगों को धमकाया जा रहा है। इंदौर में दूषित पानी पीने से लोगों की मौत हुई है। यह सरकार का शहरी मॉडल है और यह सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि कई शहरों में यही हो रहा… pic.twitter.com/smorxKzJ47
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) January 17, 2026
राजनीति नहीं, जिम्मेदारी निभाने आया हूं – राहुल
राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उनका दौरा राजनीति से प्रेरित नहीं है।
उन्होंने कहा
“मैं यहां राजनीति करने नहीं आया हूं, बल्कि अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने आया हूं। अगर सवाल पूछना राजनीति है, तो हां, मैं यह करता रहूंगा। जनता को साफ पानी मिलना उनका अधिकार है।”
अब तक क्या हुआ ? – पूरी स्थिति एक नजर में
मौतों का आंकड़ा
स्थानीय लोगों और कांग्रेस नेताओं के अनुसार दूषित पानी से अब तक 24 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
वहीं प्रशासन इससे कम संख्या की पुष्टि कर रहा है।
मुआवजा
राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
जांच
मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने संज्ञान लेते हुए इसे प्रशासनिक विफलता बताया है और रिपोर्ट तलब की है।



