देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक HDFC Bank को मार्च 2026 तिमाही में भारी दबाव का सामना करना पड़ा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने इस दौरान बैंक के करीब 35,000 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए, जिसके चलते बैंक के शेयरों में 26.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट मार्च 2020 के बाद सबसे बड़ी मानी जा रही है, जब कोविड-19 के दौरान शेयर 33 प्रतिशत से अधिक टूटे थे।
बैंक के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार, FIIs ने अपनी हिस्सेदारी 3.6 प्रतिशत घटाकर 47.95 करोड़ शेयर कम किए। दिसंबर 2025 में जहां विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 47.67 प्रतिशत थी, वहीं मार्च 2026 में यह घटकर 44.05 प्रतिशत रह गई। साथ ही, बैंक में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों की संख्या भी 2,757 से घटकर 2,528 रह गई।
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इस गिरावट की बड़ी वजह बैंक के चेयरमैन Atanu Chakraborty का अचानक इस्तीफा माना जा रहा है। उन्होंने “कुछ घटनाओं और प्रथाओं” को अपने नैतिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए पद छोड़ा। हालांकि उन्होंने किसी प्रकार की अनियमितता का सीधा आरोप नहीं लगाया, लेकिन इस खबर का बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा।
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इस्तीफे के दिन ही बैंक का शेयर एक दिन में 8.7 प्रतिशत गिर गया और तीन कारोबारी सत्रों में कंपनी का लगभग 16.3 अरब डॉलर का मार्केट वैल्यू खत्म हो गया।
वहीं दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने इस मौके का फायदा उठाया। म्यूचुअल फंड्स ने लगातार पांचवीं तिमाही में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 29.54 प्रतिशत कर दी, जो पहले 26.66 प्रतिशत थी। इस दौरान म्यूचुअल फंड्स ने करीब 28,293 करोड़ रुपये के 38.67 करोड़ शेयर खरीदे।
प्रोविडेंट फंड्स ने भी 2,239 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि इंश्योरेंस कंपनियों ने 256 करोड़ रुपये का निवेश बढ़ाया। हालांकि Life Insurance Corporation of India (LIC) ने इस दौरान 969 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए।
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म JPMorgan ने HDFC Bank पर ‘न्यूट्रल’ रेटिंग बरकरार रखते हुए कहा है कि जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक बाजार में नकारात्मक धारणा बनी रह सकती है। वहीं Jefferies ने भी बैंक के प्रदर्शन को प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कमजोर बताया और पश्चिम एशिया के संभावित भू-राजनीतिक तनाव को अतिरिक्त जोखिम बताया है।
कुल मिलाकर, HDFC Bank के लिए यह तिमाही चुनौतीपूर्ण रही है, जहां विदेशी निवेशकों की बिकवाली और नेतृत्व में बदलाव ने निवेशकों के विश्वास को प्रभावित किया है। आने वाले समय में प्रबंधन की स्पष्टता और बाजार की स्थिरता ही बैंक के शेयरों की दिशा तय करेगी।



