डिजिटल युग के विस्तार के साथ अब ग्वालियर शहर में यात्रियों को मिलने वाली एक पुरानी सुविधा समाप्त हो गई है। करीब पांच वर्षों से चल रही डाकघर के माध्यम से ट्रेन टिकट बुकिंग व्यवस्था को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। यह निर्णय हाल ही में लागू किया गया, जिसके बाद अब यात्रियों को टिकट के लिए केवल ऑनलाइन माध्यमों पर निर्भर रहना होगा।
रेलवे प्रशासन की ओर से यह कदम डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने और ऑफलाइन सिस्टम पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। हालांकि, इस फैसले से उन यात्रियों को असुविधा हो रही है जो अब तक डाकघर से टिकट लेना ज्यादा आसान मानते थे।
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इन 7 डाकघरों से मिलती थी टिकट सुविधा
अब तक ग्वालियर शहर के सात प्रमुख डाकघरों में रेलवे टिकट उपलब्ध कराए जाते थे। इनमें शामिल थे—
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- महाराज बाड़ा
- मुरार
- मोती महल
- बिरला नगर
- जयेंद्रगंज
- रेलवे स्टेशन क्षेत्र
- ठाठीपुर आरकेबीएम
इन सभी स्थानों पर रेलवे की ओर से बाकायदा काउंटर और तकनीकी व्यवस्था की गई थी, ताकि आसपास के लोगों को स्टेशन जाने की जरूरत न पड़े।
महाराज बाड़ा डाकघर था सबसे बड़ा केंद्र
महाराज बाड़ा स्थित डाकघर शहर का सबसे व्यस्त टिकट केंद्र माना जाता था। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री टिकट बुक कराने पहुंचते थे। खासतौर पर बुजुर्ग, ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले लोग और वे यात्री जो ऑनलाइन टिकट बुकिंग से सहज नहीं थे, उनके लिए यह सुविधा बेहद उपयोगी थी।

पूरी तरह ऑनलाइन हुई टिकट व्यवस्था
अब ट्रेन टिकट बुकिंग पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट कर दी गई है। यात्री IRCTC वेबसाइट, मोबाइल ऐप और अन्य अधिकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए टिकट बुक कर सकते हैं।
Indian Railways की ओर से लगातार ऑनलाइन सेवाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। हालांकि, डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण अभी भी कई लोगों को टिकट बुक करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में लोग इस व्यवस्था के अभ्यस्त हो जाएंगे और डिजिटल इंडिया अभियान को मजबूती मिलेगी।
आम यात्रियों पर क्या पड़ा असर?
- बुजुर्गों और ग्रामीण यात्रियों को सबसे अधिक दिक्कत
- इंटरनेट और स्मार्टफोन न होने पर टिकट बुकिंग मुश्किल
- स्टेशन पर भीड़ बढ़ने की संभावना
- साइबर कैफे और एजेंटों पर निर्भरता बढ़ी



