बस्तर पंडुम 2026 का समापन, भारत की संस्कृति का आभूषण है बस्तर – अमित शाह

जगदलपुर में बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर की संस्कृति को भारत का आभूषण बताया और नक्सलियों से हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की। पढ़ें पूरी रिपोर्ट और विजेताओं की सूची।

UTN Hindi ।। Digital Team

Author | Updated: 09 Feb 2026, 06:37 PM IST | 0 min read
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जगदलपुर, 9 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ के बस्तर में आयोजित तीन दिवसीय बस्तर पंडुम महोत्सव का समापन रविवार को भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और कला कौशल की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर की पहचान बंदूक या बारूद से नहीं, बल्कि इसकी विरासत और संस्कृति से है। उन्होंने इसे भारत की संस्कृति का आभूषण बताया।

समारोह को संबोधित करते हुए गृहमंत्री ने क्षेत्र में सक्रिय बचे नक्सलियों से हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करने और समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो लोग हिंसा का रास्ता छोड़ेंगे, सरकार उनका सम्मानपूर्वक पुनर्वास करेगी, लेकिन सशस्त्र संघर्ष जारी रखने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार की लड़ाई आदिवासियों की सुरक्षा और विकास के लिए है।

अमित शाह ने कहा कि माओवाद ने दुनिया के किसी भी हिस्से में स्थायी समाधान नहीं दिया है, बल्कि हिंसा और तबाही ही फैलाई है। बस्तर का भविष्य शिक्षा, रोजगार और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण में है। उन्होंने विश्वास जताया कि विकास और शांति के साथ बस्तर नई ऊंचाइयों को छुएगा।

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महोत्सव के दौरान बारह विधाओं में आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेता दलों को सम्मानित किया गया। विशेष घोषणा करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने वाली टीमों को राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित कर उनकी कला का प्रदर्शन करवाया जाएगा।

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प्रमुख विजेता

  • जनजातीय नृत्य – बुधराम सोढ़ी (दंतेवाड़ा)
  • जनजातीय गीत – पालनार दल (दंतेवाड़ा)
  • जनजातीय नाट्य – लेखम लखा (सुकमा)
  • वाद्ययंत्र – रजऊ मंडदी एवं साथी (कोंडागांव)
  • वेशभूषा – गुंजन नाग (सुकमा)
  • आभूषण – सुदनी दुग्गा (नारायणपुर)
  • शिल्प – ओमप्रकाश गावड़े (कांकेर)
  • चित्रकला – दीपक जुर्री (कांकेर)
  • पेय पदार्थ – भैरम बाबा समूह (बीजापुर)
  • व्यंजन – ताराबती (दंतेवाड़ा)
  • आंचलिक साहित्य – उत्तम नाईक (कोंडागांव)
  • वन औषधि – राजदेव बघेल (बस्तर)

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम स्थल लालबाग मैदान में जनजातीय परंपराओं पर आधारित प्रदर्शनी लगाई गई, जहां हस्तशिल्प, वन उत्पाद, औषधीय पौधे और पारंपरिक जीवनशैली से जुड़े स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहे। केंद्रीय गृहमंत्री ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन कर कलाकारों और कारीगरों से संवाद भी किया।

उल्लेखनीय है कि 7 से 9 फरवरी तक चले इस महोत्सव में बस्तर संभाग के सात जिलों से आए कलाकारों ने नृत्य, गीत, चित्रकला, शिल्पकला और लोक वाद्ययंत्रों सहित विभिन्न विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। तीन दिनों तक चली प्रस्तुतियों ने बस्तर की सांस्कृतिक विविधता और लोक परंपराओं की जीवंत झलक पेश की।

बस्तर पंडुम 2026 ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जनजातीय संस्कृति न केवल क्षेत्रीय पहचान है, बल्कि राष्ट्रीय गौरव की धरोहर भी है।

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