जमानत अधिकार है, सज़ा नहीं: उमर खालिद केस पर बोले पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़, राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों पर भी रखी बेबाक राय

UTN Hindi ।। Digital Team

Author | Updated: 19 Jan 2026, 04:39 PM IST | 1 min read
जमानत अधिकार है, सज़ा नहीं: उमर खालिद केस पर बोले पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़, राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों पर भी रखी बेबाक राय
Share:

जमानत अधिकार है, सज़ा नहीं: पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ का बड़ा बयान

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ ने रविवार को जमानत व्यवस्था को लेकर बड़ा और स्पष्ट बयान दिया। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में पत्रकार वीर सांघवी के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि “सजा से पहले जमानत नागरिक का अधिकार है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में अदालतों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।”

उन्होंने यह टिप्पणी 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में सामाजिक कार्यकर्ता उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज होने के संदर्भ में की।

New Edition

Read Today's E-Magazine

Swipe through the complete digital edition of Urjanchal Tiger right on your screen.

“दोष सिद्ध होने तक हर व्यक्ति निर्दोष है”

पूर्व CJI ने कहा कि भारतीय न्याय प्रणाली की बुनियाद Presumption of Innocence यानी दोष सिद्ध होने तक निर्दोष मानने के सिद्धांत पर टिकी है।

Advertisement

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा “मैं यह बात एक जज के तौर पर नहीं, बल्कि एक नागरिक के रूप में कह रहा हूं। जमानत से पहले किसी को वर्षों जेल में रखना सज़ा के समान है। अगर कोई व्यक्ति 5–7 साल जेल में रहकर बाद में बरी हो जाता है, तो उस खोए हुए समय की भरपाई कैसे होगी?”

कब ज़रूरी है जमानत से इनकार?

चंद्रचूड़ ने तीन स्पष्ट परिस्थितियों का ज़िक्र किया, जिनमें जमानत न देना उचित हो सकता है—

  1. अगर आरोपी समाज के लिए खतरा हो (जैसे सीरियल अपराधी)
  2. अगर जमानत के बाद फरार होने की आशंका हो
  3. अगर सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना हो
  4. उन्होंने कहा कि “यदि ये तीनों स्थितियां मौजूद नहीं हैं, तो जमानत नियम होनी चाहिए, अपवाद नहीं।”

राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर अधिकारों का हनन?

पूर्व CJI ने चिंता जताते हुए कहा कि आजकल राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के नाम पर निर्दोषता की धारणा को उलट दिया गया है। “कोर्ट को यह जांचना चाहिए कि वाकई राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है या नहीं। सिर्फ आरोप के आधार पर किसी को सालों जेल में रखना संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।” उन्होंने कहा कि अगर ट्रायल समय पर पूरा नहीं होता, तो वह Right to Speedy Trial का सीधा उल्लंघन है।

जमानत अधिकार है, सज़ा नहीं: उमर खालिद केस पर बोले पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़, राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों पर भी रखी बेबाक राय

निचली अदालतों पर दबाव, जमानत देने से डर

चंद्रचूड़ ने जिला और हाई कोर्ट्स की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि

  • जजों में डर का माहौल है
  • जमानत देने पर उनके इरादों पर सवाल उठाए जाते हैं
  • करप्शन या नैतिकता पर शक किया जाता है
  • इसी कारण ज़्यादातर मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच जाते हैं

उन्होंने बताया कि हर साल करीब 70,000 मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हो जाते हैं।

“गलत फैसले को सुधारिए, जज को डराइए मत”

पूर्व CJI ने कहा कि अगर कोई जिला जज गलत जमानत देता है, तो उसे ऊपरी अदालत में सुधारा जा सकता है, लेकिन उस पर नैतिक दबाव बनाना न्यायिक प्रणाली को कमजोर करता है।

“एक छोटी सी टिप्पणी भी किसी जज का करियर खराब कर सकती है। इससे न्यायपालिका में भय का माहौल बनता है।”

भ्रष्टाचार पर भी खुलकर बोले

चंद्रचूड़ ने स्वीकार किया कि न्यायपालिका भी समाज से ही आती है और यहां भी भ्रष्टाचार की समस्या हो सकती है, लेकिन इसके समाधान के लिए मजबूत जवाबदेही तंत्र ज़रूरी है।

“हर गलत फैसले को भ्रष्टाचार कहना आसान है, लेकिन सच्चाई को समझना ज़रूरी है।”

ADVERTISEMENT