3 घंटे में कंटेंट हटाओ वरना कार्रवाई ! IT Rules 2026 का बड़ा अपडेट !

AI डीपफेक और फर्जी कंटेंट पर केंद्र सरकार की सख्ती। नए IT Rules 2026 के तहत 2–3 घंटे में टेकडाउन, अनिवार्य लेबलिंग और सेफ हार्बर पर खतरा। पूरी खबर पढ़ें।

UTN Hindi ।। Digital Team

Author | Updated: 11 Feb 2026, 12:17 PM IST | 1 min read
AI Deepfake IT Rules 2026 Social Media Law
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डिजिटल दुनिया में तेजी से बढ़ रहे AI डीपफेक, फर्जी वीडियो और सिंथेटिक कंटेंट पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कानूनी कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम, 2026 लागू कर दिए गए हैं, जो 20 फरवरी 2026 से प्रभावी होंगे।

संशोधित नियमों के अनुसार, अब अदालत या “उपयुक्त सरकार” द्वारा अवैध घोषित कंटेंट को केवल 3 घंटे में हटाना होगा। वहीं, गैर-सहमति से बने डीपफेक और नग्नता से जुड़े संवेदनशील कंटेंट को 2 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा। इससे पहले प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट पर कार्रवाई के लिए 24 से 36 घंटे तक का समय मिलता था।

2–3 घंटे में टेकडाउन अनिवार्य

नए नियम के अनुसार

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  • कोर्ट या सरकार द्वारा अवैध घोषित कंटेंट – 3 घंटे में हटाना होगा
  • गैर-सहमति वाली नग्नता, डीपफेक, आपत्तिजनक सामग्री – सिर्फ 2 घंटे में हटाना अनिवार्य

पहले यह समय सीमा 24–36 घंटे तक थी। अब कंपनियों को तुरंत कार्रवाई करनी होगी, नहीं तो कानूनी जोखिम बढ़ेगा।

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AI-जनरेटेड कंटेंट की नई परिभाषा

सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) संशोधन नियम, 2026 में सिंथेटिक या AI-जनरेटेड कंटेंट को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इसमें ऐसे ऑडियो, वीडियो या ऑडियो-विजुअल कंटेंट शामिल हैं जो कंप्यूटर या एल्गोरिदम की मदद से बनाए या बदले गए हों और जो किसी व्यक्ति या घटना को इस तरह दर्शाते हों कि वह वास्तविक प्रतीत हो।

हालांकि, सरकार ने यह भी साफ किया है कि स्मार्टफोन कैमरों द्वारा किए जाने वाले सामान्य ऑटोमैटिक टच-अप (जैसे ब्राइटनेस या कलर करेक्शन) को इस श्रेणी में नहीं रखा जाएगा।

अब अनिवार्य होगा AI लेबल

सोशल मीडिया कंपनियों को

  • यूजर से घोषणा लेनी होगी कि कंटेंट AI से बना है या नहीं
  • AI कंटेंट पर स्पष्ट और प्रमुख लेबल लगाना होगा
  • मेटाडेटा/पहचान टैग जोड़ना होगा
  • लेबल हटाने या छेड़छाड़ की अनुमति नहीं होगी

इससे यूजर्स को तुरंत पता चलेगा कि कंटेंट असली है या कृत्रिम

नियम तोड़े तो ‘सेफ हार्बर’ खत्म

यदि प्लेटफॉर्म जानबूझकर फर्जी या डीपफेक सामग्री को नहीं हटाते, तो उन्हें सेफ हार्बर सुरक्षा नहीं मिलेगी। इसका मतलब है कि प्लेटफॉर्म भी कानूनी रूप से जिम्मेदार माने जा सकते हैं।

सेफ हार्बर वह कानूनी सुरक्षा है जिसके तहत यूजर द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए प्लेटफॉर्म्स को सीधे जिम्मेदार नहीं माना जाता।

राज्यों को भी मिला अधिकार

राज्यों को अब टेकडाउन आदेश जारी करने के लिए एक से अधिक अधिकृत अधिकारी नियुक्त करने की अनुमति दी गई है, ताकि बड़े राज्यों में शिकायतों का तेजी से निपटारा हो सके

क्या बदलेगा आम यूजर के लिए?

  • डीपफेक और फर्जी वीडियो जल्दी हटेंगे
  • AI फोटो/वीडियो पर साफ चेतावनी दिखेगी
  • गलत सूचना फैलाने पर अकाउंट सस्पेंड हो सकता है
  • डिजिटल सुरक्षा और निजता मजबूत होगी

AI डीपफेक और फर्जी डिजिटल कंटेंट के बढ़ते खतरे के बीच सरकार का यह फैसला ऑनलाइन सुरक्षा, निजता और डिजिटल भरोसे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इन नियमों का प्रभाव सोशल मीडिया कंपनियों की नीतियों और यूजर्स की जिम्मेदारी, दोनों पर साफ नजर आएगा।

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