सिंगरौली, मध्य प्रदेश। सिंगरौली पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए ग्राम कंजी में एक नाबालिग बालिका का बाल विवाह रुकवा दिया। पुलिस को सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची टीम ने परिजनों को समझाइश दी। जांच में बालिका की जन्मतिथि 16 अगस्त 2012 पाई गई, जिसके बाद उसे और उसकी मां को Child Welfare Committee (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
Singrauli News: ग्राम कंजी में बाल विवाह रुकवाने के लिए प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई
सिंगरौली पुलिस अधीक्षक श्री शियाज़ के.एम. (भा.पु.से.) को सूचना प्राप्त हुई कि ग्राम कंजी निवासी एक व्यक्ति (नाम गोपनीय) अपनी लगभग 16 वर्षीय नाबालिग पुत्री का विवाह 19 जून 2026 को ग्राम कर्थुआ निवासी युवक के साथ कराने की तैयारी कर रहा है।
सूचना मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर महिला थाना प्रभारी आराधना सिंह को मामले की पुष्टि करने के निर्देश दिए गए।
Child Marriage Case: महिला एवं बाल विकास विभाग ने मौके पर पहुंचकर दी समझाइश
मामले की जानकारी जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री जीतेंद्र गुप्ता को दी गई। इसके बाद खुटार चौकी प्रभारी शीतला यादव के सहयोग से 18 जून 2026 को सीडीपीओ बिंदू उइके एवं उनकी टीम ग्राम कंजी पहुंची और परिजनों को बाल विवाह न करने की समझाइश दी।
जन्मतिथि की जांच में बालिका निकली नाबालिग
19 जून 2026 को पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री सर्वप्रिय सिन्हा, महिला थाना प्रभारी, खुटार चौकी पुलिस बल तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम दोबारा गांव पहुंची। उस समय विवाह की तैयारियां चल रही थीं और बारात आने की तैयारी भी की जा रही थी।
जांच के दौरान बालिका की कक्षा 9वीं की अंकसूची में उसकी जन्मतिथि 16 अगस्त 2012 दर्ज मिली, जिससे स्पष्ट हुआ कि वह कानूनी रूप से विवाह योग्य आयु से कम है।
Child Welfare Committee (CWC) के समक्ष किया गया प्रस्तुत
बालिका के नाबालिग होने की पुष्टि के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने उसे तथा उसकी मां को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के तहत Child Welfare Committee (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया।
प्रशासन द्वारा मामले में आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है।
पुलिस और प्रशासन की लोगों से अपील
जिला प्रशासन और पुलिस ने जिले के नागरिकों से अपील की है कि वे अपने अवयस्क पुत्र-पुत्रियों का विवाह न करें और उन्हें शिक्षा प्राप्त करने का अवसर दें।
प्रशासन का कहना है कि बाल विवाह बच्चों के भविष्य, शिक्षा और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। सही समय पर लिया गया निर्णय उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव रख सकता है।





















