AI नहीं सुनाएगा फैसला ! अदालतों में AI के उपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए नए ड्राफ्ट नियम।

सुप्रीम कोर्ट के नए ड्राफ्ट नियम यह सुनिश्चित करने की कोशिश करते हैं कि अदालतों में AI का उपयोग पारदर्शी, जिम्मेदार और न्यायिक नियंत्रण के तहत हो। मसौदे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि किसी भी परिस्थिति में AI को न्यायाधीश की भूमिका नहीं दी जाएगी और अंतिम फैसला हमेशा मानव न्यायिक अधिकारी ही करेंगे।

UTN Hindi ।। Digital Team

Author | Updated: 05 Jun 2026, 08:11 AM IST | 1 min read
अदालतों में AI के उपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए नए ड्राफ्ट नियम।
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सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की अदालतों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को लेकर ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं और आम जनता व संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं। प्रस्तावित नियमों के अनुसार AI किसी भी मामले में फैसला सुनाने या सजा तय करने का कार्य स्वतंत्र रूप से नहीं कर सकेगा। अंतिम निर्णय का अधिकार केवल न्यायिक अधिकारियों के पास रहेगा।

अदालतों में AI के उपयोग पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पहल

Supreme Court of India ने बुधवार को देशभर की अदालतों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग के लिए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं।

शीर्ष अदालत ने इस प्रस्ताव पर हितधारकों, कानूनी विशेषज्ञों और आम नागरिकों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। सुझाव ईमेल के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट की AI समिति के सदस्य सचिव को भेजे जा सकते हैं।

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AI नहीं कर सकेगा फैसला या सजा तय

“Regulations for Use of Artificial Intelligence in Courts, 2026” नामक मसौदा नियमों में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी AI सिस्टम स्वतंत्र रूप से किसी मामले का फैसला (Adjudication) या सजा (Sentencing) निर्धारित नहीं कर सकेगा।

ड्राफ्ट में कहा गया है

“किसी भी मामले में AI सिस्टम बिना अनिवार्य Human-in-the-Loop व्यवस्था के निर्णय या सजा से संबंधित कार्य नहीं करेगा। AI द्वारा दिए गए किसी भी सुझाव को केवल सलाह (Advisory) माना जाएगा और उस पर स्वतंत्र न्यायिक मूल्यांकन आवश्यक होगा।”

अंतिम निर्णय न्यायाधीश का ही होगा

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि AI का उपयोग केवल सहायक उपकरण (Assistive Tool) के रूप में किया जाएगा।

नियमों के अनुसार

  • AI न्यायिक प्रक्रिया में सहायता कर सकता है।
  • AI कानूनी दस्तावेजों के विश्लेषण में मदद कर सकता है।
  • AI शोध और डेटा प्रबंधन में उपयोगी हो सकता है।
  • लेकिन अंतिम निर्णय लेने का अधिकार केवल न्यायाधीश के पास रहेगा।

मानव निर्णय सर्वोपरि रहेगा

मसौदा नियमों में कहा गया है कि अदालतों में AI का उपयोग हमेशा मानव निर्णय और न्यायिक अधिकार के अधीन रहेगा।

AI किसी भी परिस्थिति में न्यायिक अधिकारी की स्वतंत्र सोच, विवेक और अधिकार का स्थान नहीं ले सकेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि तकनीक का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को बेहतर बनाना है, न कि न्यायाधीशों की भूमिका को प्रतिस्थापित करना।

सुझाव आमंत्रित

सुप्रीम कोर्ट ने मसौदा नियमों पर विभिन्न पक्षों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक के तेजी से बढ़ते उपयोग को देखते हुए यह पहल भारतीय न्यायपालिका में तकनीकी उपयोग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

न्यायपालिका में AI की बढ़ती भूमिका

हाल के वर्षों में दुनिया भर की अदालतें दस्तावेजों के विश्लेषण, कानूनी शोध, अनुवाद और केस मैनेजमेंट जैसे कार्यों में AI आधारित तकनीकों का उपयोग कर रही हैं।

हालांकि AI की विश्वसनीयता, डेटा सुरक्षा, पक्षपात (Bias) और जवाबदेही जैसे मुद्दों को लेकर भी लगातार बहस होती रही है।

इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि AI केवल एक सहायक प्रणाली होगी, जबकि न्यायिक निर्णय पूरी तरह मानव न्यायाधीशों द्वारा ही लिए जाएंगे।

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