Youtuber Dhruv Rathee पर Delhi High Court का फैसला, हिंदू देवताओं को लेकर क्या दावा किया था?

दिल्ली हाईकोर्ट ने ध्रुव राठी के विवादित वीडियो पर GAC को 15 दिनों में फैसला लेने का निर्देश दिया है। जानिए पूरा मामला, याचिका में क्या आरोप हैं और कोर्ट ने क्या कहा।

UTN Hindi ।। Digital Team

Author | Updated: 04 Jul 2026, 07:09 PM IST | 1 min read
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नई दिल्ली। Youtuber Dhruv Rathee के एक कथित विवादित वीडियो को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। अदालत ने ग्रिवेंस अपीलेट कमेटी (GAC) को आदेश दिया है कि वीडियो के संबंध में दायर शिकायत पर 15 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके आदेश की अनदेखी को गंभीरता से लिया जाएगा।

Youtuber Dhruv Rathee से जुड़ा क्या है पूरा मामला?

विवाद 21 मार्च 2021 को पब्लिश Youtuber Dhruv Rathee के एक वीडियो से जुड़ा है, जिसका शीर्षक था “Can Hindus Eat Beef?”। याचिकाकर्ता का आरोप है कि वीडियो में हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक मान्यताओं को लेकर आपत्तिजनक और भ्रामक दावे किए गए।

मामले में अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर वीडियो हटाने और कानूनी कार्रवाई की मांग की।

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हाईकोर्ट ने क्या कहा ?

3 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति की पीठ ने GAC (Grievance Appellate Committee) को निर्देश दिया कि वह शिकायत पर 15 दिनों के भीतर फैसला करे।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि यदि किसी कंटेंट से नफरत फैलने या सामाजिक तनाव की आशंका हो, तो प्लेटफॉर्म को उचित सावधानी बरतनी चाहिए।

क्या आरोप लगाए गए?

दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि वीडियो में

  • भगवान राम और माता सीता ने वनवास के दौरान मांस और शराब का सेवन किया।
  • माता सीता ने गंगा को शराब अर्पित की।
  • धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या गलत तरीके से प्रस्तुत की गई।

याचिकाकर्ता का कहना है कि ये दावे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले और तथ्यात्मक रूप से गलत है।

पहले भी हुई थी शिकायत

याचिकाकर्ता के अनुसार

  1. पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
  2. संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की गई।
  3. आईटी नियम 2021 के तहत GAC के समक्ष भी शिकायत की गई।

हालांकि, पहले शिकायत खारिज करते हुए कहा गया था कि वीडियो प्लेटफॉर्म की कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन नहीं करता।

GAC क्या है?

Grievance Appellate Committee (GAC) केंद्र सरकार द्वारा गठित एक अपीलीय समिति है, जहां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शिकायतों के विरुद्ध अपील की जा सकती है।

अब इस मामले में क्या स्थिति है?

फिलहाल अदालत ने Video हटाने का सीधा आदेश नहीं दिया है। केवल GAC को शिकायत पर 15 दिनों के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। वीडियो हटेगा या नहीं, या आगे कोई कानूनी कार्रवाई होगी, इसका फैसला पूरी प्रक्रिया  होने के बाद सामने आएगा।

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