Bollywood music royalty system India : बॉलीवुड संगीत जगत को बड़ा झटका देते हुए देश के सबसे लोकप्रिय प्लेबैक सिंगर्स में शुमार Arijit Singh ने 27 जनवरी 2026 को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए घोषणा की कि वे अब कोई नया प्लेबैक असाइनमेंट स्वीकार नहीं करेंगे। अपने संदेश में उन्होंने इसे “एक शानदार सफर का अंत” बताया।
यह खबर सामने आते ही करोड़ों फैंस हैरान रह गए। ‘तुम ही हो’, ‘चन्ना मेरेया’, ‘जाने ना’ जैसे सुपरहिट गीतों से दिलों पर राज करने वाली आवाज का यूं अचानक दूर होना सिर्फ एक निजी फैसला नहीं, बल्कि इंडस्ट्री की गहरी समस्याओं की ओर इशारा करता है।
Also Read
रॉयल्टी सिस्टम का कड़वा सच
Bollywood music royalty system India बॉलीवुड में प्लेबैक सिंगर्स को आमतौर पर गाने के बदले एकमुश्त भुगतान किया जाता है। जबकि वही गाना वर्षों तक ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, रेडियो, यूट्यूब और लाइव इवेंट्स से करोड़ों की कमाई करता रहता है।
Read Today's E-Magazine
Swipe through the complete digital edition of Urjanchal Tiger right on your screen.
रॉयल्टी वितरण की जिम्मेदारी इंडियन परफॉर्मिंग राइट सोसाइटी (IPRS) और इंडियन सिंगर्स एंड राइटर्स राइट्स एसोसिएशन (ISRA) जैसे संगठनों पर है, लेकिन कई कलाकारों का आरोप है कि उन्हें वास्तविक कमाई का बहुत छोटा हिस्सा मिलता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशों में स्ट्रीमिंग मॉडल पारदर्शी है जहां कलाकारों को हर प्ले के हिसाब से आय मिलती है, जबकि भारत में यह व्यवस्था अब भी असंतुलित मानी जाती है।
Abhijeet Sawant का खुलासा, बहस तेज
‘इंडियन आइडल सीजन 1’ के विजेता Abhijeet Sawant ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि इंडस्ट्री में सिंगर्स को “फिल्म से बड़ा बनने नहीं दिया जाता”। उनके मुताबिक, काम के लालच में कलाकार कम पैसों पर समझौता कर लेते हैं और यही शोषण का कारण बनता है।
उन्होंने यह भी कहा कि विदेशों में दो-तीन हिट गानों की रॉयल्टी से जिंदगी चल सकती है, लेकिन भारत में सुपरहिट गाने गाने वाले कलाकार भी आर्थिक सुरक्षा से जूझते हैं। यह बयान अरिजीत के फैसले के तुरंत बाद आया, जिससे मामला और गरमा गया।
सोशल मीडिया पर मिल रहा खूब समर्थन !
अरिजीत के फैसले के बाद सोशल मीडिया पर #PaySingersFairly और #ArijitSinghRetirement जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। फैंस के साथ कई वरिष्ठ कलाकारों ने भी सिंगर्स के हक की मांग उठाई।
इंडस्ट्री में पारदर्शी कॉन्ट्रैक्ट, न्यूनतम रॉयल्टी प्रतिशत और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से डायरेक्ट पेमेंट सिस्टम लागू करने की आवाज तेज हो रही है।



