इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा आदेश : राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ ब्रिटिश नागरिकता के आरोपों को लेकर FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। जानें पूरा मामला, कानूनी पहलू और ताजा अपडेट।

UTN Hindi ।। Digital Team

Author | Updated: 17 Apr 2026, 07:32 PM IST | 1 min read
इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा आदेश : राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश
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उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला उनकी कथित ब्रिटिश नागरिकता और यूके पासपोर्ट रखने के आरोपों से जुड़ा हुआ है।

यह आदेश एकल पीठ के न्यायमूर्ति Subhash Vidhyarthi ने सुनाया। अदालत ने संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।

क्या है पूरा मामला

यह विवाद उस याचिका से शुरू हुआ जिसमें आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी भारतीय नागरिक होने के बावजूद ब्रिटिश नागरिकता भी रखते हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह भारतीय कानूनों विशेष रूप से नागरिकता अधिनियम और पासपोर्ट नियमों का उल्लंघन हो सकता है।

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इस मामले में पहले भी सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से जानकारी मांगी गई थी और गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा आदेश : राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश

अदालत की प्रक्रिया और ताजा स्थिति

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच पहले इस मामले में विस्तृत सुनवाई कर चुकी है और केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने के निर्देश भी दिए गए थे।

ताजा आदेश में अदालत ने यह स्पष्ट किया कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जांच आवश्यक है, जिसके लिए FIR दर्ज करना उचित होगा। इस निर्णय को याचिकाकर्ता ने “महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक” बताया है।

कानूनी और राजनीतिक असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मामले में आरोपों की पुष्टि होती है, तो इसका सीधा असर राहुल गांधी की संसदीय सदस्यता और राजनीतिक भविष्य पर पड़ सकता है। भारतीय कानून के अनुसार, दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है, और यदि कोई व्यक्ति विदेशी नागरिकता ग्रहण करता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो सकती है।

हालांकि, अभी यह केवल प्रारंभिक चरण है और FIR दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियां तथ्य जुटाएंगी। अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह आदेश देश की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है। आने वाले दिनों में इस मामले की जांच और अदालत की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें रहेंगी। फिलहाल, यह मामला कानूनी जांच के दायरे में प्रवेश कर चुका है, जिससे इसकी गंभीरता और बढ़ गई है।

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